अंशुमान तिवारी
सिंगापुर। विश्व व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव लाने के वादे तो बहुत से नेताओं ने किये लेकिन हकीकत में इस बारे में कुछ करने का काम बहुत कम ही ने किया। इन चुनिंदा लीडरों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है। सिंगापुर में 12 जून को हुयी बहुप्रतीक्षित बैठक में ट्रंप और किम ने कोरियायी प्रायद्वीप की सत्तर साल पुरानी अदावत को खत्म करने का अभूतपूर्व काम शुरू किया है। दक्षिण कोरियायी राष्ट्रपति मून जे इन के संग मिल कर ट्रंप और किम एशियायी राजनीति को पलटने की दिशा में आगे बढ़े हैं।
डोनाल्ड ट्रंप जब जी-7 देशों की बैठक से नाराज होकर सिंगापुर के लिए चले थे तो उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग के साथ उनकी मुलाकात को लेकर तमाम आशंकाएं जताई जा रही थीं। इस ‘महामुलाकात’ की सफलता को लेकर कोई मुतमइन नहीं था। ट्रंप से मुलाकात से पहले किम ने कहा भी कि मुझे लगता है कि पूरी दुनिया इस पल को देख रही है। दुनिया के कई लोग इसे सपना समझ रहे होंगे या फिर किसी साइंस फिक्शन फिल्म का सीन। लेकिन वाकई ये किसी साइंस फिक्शन फिल्म की हैप्पी एंडिंग से कम नहीं है और कोरियाई प्रायद्वीप के लोगों के लिए सपने से कम भी नहीं। सच्चाई यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपतियों के लिए उत्तर कोरिया ऐसा घाव रहा है जिसे कोई भी राष्ट्रपति अपने शासनकाल में भर नहीं सका बल्कि यह घाव लगातार और गहरा होता गया। ओबामा के शासनकाल के समय उत्तर कोरिया पर प्रतिबंधों की भरमार हो चुकी थी और रही सही कसर ट्रंप प्रशासन ने पूरी कर दी थी। लेकिन इन सबके बावजूद ट्रंप ने अपनी विदेश नीति में उत्तर कोरिया को ट्रंप कार्ड की तरह इस्तेमाल किया और फिर जो सिंगापुर में सामने आया वो दुनिया का सबसे बड़ा अचंभा निकला। कहां तो दो दुश्मन देशों की जिद और जुनून के चलते दुनिया परमाणु हमले की दहशत में जीने को मजबूर थी और कहां बात कुछ यूं बनी कि सिंगापुर में पहले हाथ मिले और फिर दिल भी मिल गए।
उत्तर कोरिया ने कोरियाई प्रायद्वीप के पूर्ण निरस्त्रीकरण की दिशा में काम करने पर सहमति जताई है। वैसे अभी यह स्पष्टï नहीं है कि प्योंगयांग कब और कैसे ऐसा करेगा।

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किम से ऐतिहासिक मुलाकात के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक और बड़ी घोषणा की। उन्होंने ऐलान किया कि अब अमेरिका कोरियाई प्रायद्वीप में दक्षिण कोरिया के साथ सैन्य अभ्यास नहीं करेगा। ट्रंप ने कहा कि हम वॉर गेम्स को बंद कर देंगे, जिससे हमारा काफी पैसा भी बचेगा। उन्होंने कहा कि वॉर गेम्स को रोकने पर सहमति इसलिए बनी क्योंकि उन्हें लगता है कि यह काफी भड़काऊ है। उन्होंने यहां तक कहा कि यह वार्ता उम्मीदों से कहीं बेहतर रही और उनका किम के साथ काफी अनोखा रिश्ता बन गया है। दक्षिण कोरिया के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास न करने की ट्रंप की यह घोषणा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उत्तर कोरिया की प्रमुख मांग पूरी होती है। उत्तर कोरिया काफी दिनों से इसे अपनी सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए बंद करने की मांग करता रहा है। वार्ता के बाद किम ने भी कहा कि हमने बीती बातों को पीछे छोड़कर आगे बढऩे का फैसला किया है।

निरस्त्रीकरण के प्रति प्रतिबद्धता
दोनों नेताओं की वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान के अनुसार ट्रंप और किम ने दोनों देशों के नये संबंधों की स्थापना से जुड़े मुद्दों पर तथा कोरियाई प्रायद्वीप में एक स्थायी एवं मजबूत शांति के निर्माण को लेकर गहराई व बेबाकी से बातचीत की। ट्रंप ने कहा कि हमने एक संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर किए जो उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण की एक अटूट प्रतिबद्धता है। उन्होंने कहा कि किम उत्तर कोरिया को अलग-थलग पड़े देश से एक ऐसे देश में बदलना चाहते हैं जो विश्व समुदाय का सम्मानित सदस्य हो। वैसे पर्यवेक्षकों का कहना है कि संयुक्त बयान में विस्तार से बातें नहीं की गयी हैं। खासकर इस संबंध में कि परमाणु निरस्त्रीकरण का लक्ष्य कैसे हासिल किया जाएगा। अमेरिकी मीडिया का भी कहना है कि यह आने वाले वर्षों में ही पता चलेगा कि शिखर वार्ता से परमाणु निरस्त्रीकरण में कितनी मदद मिली। ट्रंप ने परमाणु निरस्त्रीकरण से जुड़े एक सवाल के जवाब में कहा कि हम बहुत जल्दी इस बाबत प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं। इस प्रक्रिया के ब्यौरे पर चर्चा के लिए जल्द ही बैठक होगी। यह पूछे जाने पर कि क्या दोनों नेता फिर मिलेंगे, उन्होंने कहा कि हम फिर मिलेंगे,कई बार मिलेंगे।

ट्रंप बोले-किम से बन गया खास जुड़ाव
ट्रंप का यह कहना काफी महत्वपूर्ण है कि किम जोंग उन के साथ हुई उनकी ऐतिहासिक शिखर वार्ता के दौरान प्रतिभाशाली किम के साथ उनका बहुत खास जुड़ाव बन गया। किम के बारे में ट्रंप की ऐसी टिप्पणी के बारे में कुछ समय पहले तक कोई सोच भी नहीं सकता था। कुछ समय पहले तक दोनों नेता एक-दूसरे को धमकियां देते थे और एक-दूसरे के अपमान का कोई मौका हाथ से जाने नहीं देते थे। पिछले साल उत्तर कोरिया के परमाणु एवं बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण करने के बाद तो दोनों नेताओं में जुबानी जंग छिड़ गई थी। हालत यहां तक पहुंच गयी थी कि ट्रंप ने किम को परमाणु हथियारों से लैस पागल आदमी करार देते हुए कहा था कि उन्हें कुछ भी करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। ट्रंप के इस बयान के बाद अमेरिका ने उत्तर कोरिया के परमाणु एवं मिसाइल कार्यक्रमों से जुड़े लोगों एवं संस्थाओं पर प्रतिबंध लगा दिए थे। पिछले साल उत्तर कोरिया ने जापान सागर में लंबी दूरी की मिसाइल का परीक्षण किया था। इस मिसाइल के बारे में कुछ विशेषज्ञों ने कहा था कि यह अमेरिका के अलास्का प्रांत तक पहुंचने में सक्षम है।

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अब दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यास नहीं करेगा अमेरिका
ट्रंप ने एक और अहम घोषणा की कि वह दक्षिण कोरिया में तैनात अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाना चाहते हैं। चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप ने देश के लोगों से यह वादा भी किया था। ट्रंप ने कहा कि मैं अपने सैनिकों को वहां से निकालना चाहता हूं। मैं उन्हें स्वदेश बुलाना चाहता हूं। हालांकि ऐसा तुरंत करना संभव नहीं है। वैसे यह भी माना जा रहा है कि ट्रंप की यह टिप्पणी दक्षिण कोरिया के कट्टरपंथियों के कान खड़े कर सकती है, जिन्होंने उनसे देश की सुरक्षा को जोखिम में नहीं डालने का अनुरोध किया है। गौरतलब है कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया सुरक्षा के मामले में सहयोगी हैं। एक अनुमान के मुताबिक इस समय करीब 30,000 अमेरिकी सैनिक दक्षिण कोरिया में तैनात हैं। वे उत्तर कोरिया से उसे बचाने के लिए वहां तैनात किए गए हैं।

अमेरिका और दक्षिण कोरिया हर साल संयुक्त सैन्य अभ्यास करते आ रहे हैं और इस पर हमेशा उत्तर कोरिया की भौहें तनती रही हैं। उत्तर कोरिया लंबे समय से इसे बंद करने की मांग करता रहा है। इसके जवाब में उसने खुद भी बार-बार मिसाइल परीक्षण किया, जिससे क्षेत्र में तनाव बढ़ता गया। ट्रंप ने उत्तर कोरिया को खुश करते हुए कहा कि मैं इसे बहुत ही उकसाने वाला मानता हूं। जिन परिस्थितियों में हम एक पूर्ण समझौते की बात कर रहे हैं, उसमें सैन्य अभ्यास करना अनुचित है। पहली चीज तो इससे हमें धन की बचत होगी और दूसरी चीज यह कि इसकी काफी सराहना होगी। यह कदम चीन द्वारा पहले लाए गए एक प्रस्ताव पर आधारित माना जा रहा है। इसके तहत अमेरिका के सैन्य अभ्यास रोकने के बदले में उत्तर कोरिया परमाणु और मिसाइल परीक्षण नहीं करेगा।

ट्रंप की घोषणा से पेंटागन भी चकित
वार्ता के बाद ट्रंप की कोरियाई प्रायद्वीप में सैन्य अभ्यास बंद करने के एलान ने तो विश्?व के साथ-साथ पेंटागन को भी चकित कर दिया। पेंटागन को समझ में ही नहीं आ रहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ये फैसला कैसे ले लिया? ट्रंप की अचानक की गयी यह घोषणा सुनकर हर कोई आश्चर्यचकित रह गया। हालांकि घोषणा के कुछ समय बाद दक्षिण कोरिया में तैनात अमेरिकी सैनिकों ने कहा कि उनके पास अभी तक सैन्य अभ्यास बंद करने के कोई निर्देश नहीं आए हैं। इसलिए वे अब भी सैन्य अभ्यास की तैयारियां कर रहे हैं। दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सेना की प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल जेनिफर लॉवेट ने एक ईमेल के जरिए बताया कि यहां अमेरिकी कमांड को सैन्य अभ्यास रोकने से जुड़ा कोई निर्देश नहीं मिला है। जब तक हमें रक्षा मंत्रालय से कोई अपडेट नहीं मिलता तब तक हम इसी स्थिति को आगे बढ़ाएंगे।

ट्रंप की घोषणा से दक्षिण कोरिया भी स्तब्ध
दक्षिण कोरिया ने ट्रंप और किम जोंग की वार्ता को सफल बताते हुए सराहना की। दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून ने कहा कि दोनों नेताओं की वार्ता से कोरियाई प्रायद्वीप में शांति बहाल होगी। वैसे सैन्य अभ्यास बंद करने के फैसले से दक्षिण कोरिया भी हैरान है। ट्रंप की घोषणा के बाद से दक्षिण कोरियाई राजधानी सियोल में इस बात का डर है कि उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार नष्ट करने से पहले ही वॉशिंगटन रियायत देने में बहुत जल्दबाजी कर रहा है। दक्षिण कोरियाई रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी कर बताया कि दक्षिण कोरिया ट्रंप की मंशा जानने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका व दक्षिण कोरिया का सैन्य अभ्यास दुनिया के सबसे बड़े सैन्य अभ्यासों में से एक है। पिछले साल यह अभ्यास 11 दिनों तक चला था और इसमें करीब 17 हजार 500 अमेरिकी सैनिकों और 50 हजार दक्षिण कोरियाई सैनिकों ने हिस्सा लिया था।

दोनों नेताओं में हुई थी तीखी बयानबाजी
इस वार्ता पर आशंकाओं के बादल इसलिए मंडरा रहे थे क्योंकि ट्रंप व किम के बीच पिछले साल से काफी तीखी बयानबाजी चल रही थी। पिछले साल सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने पहले संबोधन में ट्रंप ने उत्तर कोरिया को पूरी तरह बर्बाद करने की धमकी दी थी। ट्रंप के इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए किम ने अमेरिकी राष्ट्रपति के व्यवहार को मानसिक तौर पर विक्षिप्त जैसा करार दिया था और जोर देकर कहा था कि डरा हुआ कुत्ता ज्यादा जोर से भौंकता है। नवंबर में ट्रंप ने आधिकारिक तौर पर उत्तर कोरिया को आतंकवाद का प्रायोजक देश घोषित कर दिया था। ट्रंप ने किम को लिटिल रॉकेटमैन भी कहा था और उत्तर कोरिया पर ऐसा हमला करने की धमकी दी थी, जैसा दुनिया में कभी किसी ने नहीं देखा होगा। इसके जवाब में किम ने ट्रंप को सठियाया हुआ बताया था। उत्तर कोरिया ने प्रशांत महासागर स्थित अमेरिकी क्षेत्र गुआम पर हमला करने की भी धमकी दी थी। यही कारण है कि सिंगापुर में किम ने उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच दुश्मनी की तरफ इशारा करते हुए कहा कि यहां तक पहुंचना आसान नहीं था।

अब परमाणु युद्ध का खतरा नहीं
किम से मुलाकात के बाद अमेरिका पहुंचने पर ट्रंप ने कहा कि उत्तर कोरिया अब अमेरिका के लिए कोई परमाणु खतरा नहीं है। ट्रंप ने वॉशिंगटन पहुंचते ही ट्वीट किया कि अभी-अभी पहुंचा हूं, लेकिन मेरे कार्यभार संभालने के दिन के मुकाबले अब हर कोई अधिक सुरक्षित महसूस कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि किम के साथ मुलाकात रोचक थी और यह अत्यंत सकारात्मक अनुभव था। भविष्य के लिए उत्तर कोरिया के पास काफी संभावना है। ट्रंप ने एक अन्य ट्वीट में कहा कि अमेरिका के लिए उत्तर कोरिया अब कोई परमाणु खतरा नहीं है। अमेरिकियों और शेष दुनिया को अब चैन की नींद सोना चाहिए। उन्होंने उत्तर कोरिया के नेता का अपने लोगों के उज्ज्वल भविष्य की ओर पहला साहसी कदम उठाने के लिए आभार जताया। वहीं दूसरी ओर अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो का कहना है कि वॉशिंगटन चाहता है कि उत्तर कोरिया 2020 तक परमाणु निरस्त्रीकरण के लक्ष्य को पूरा करे। उत्तर कोरिया ने बयान में कोरियाई प्रायद्वीप के पूर्ण निरस्त्रीकरण की दिशा में काम करने पर सहमति जताई, लेकिन इस दस्तावेज में यह स्पष्ट नहीं था कि प्योंगयांग कब और कैसे ऐसा करेगा।

पूरी दुनिया ने किया शिखर वार्ता का स्वागत
दोनों नेताओं के बीच हुई शिखर वार्ता का दुनिया भर में स्वागत किया गया है। रूस, ब्रिटेन और दक्षिण कोरिया समेत अंतर्राष्ट्रीय  समुदाय ने उम्मीद जताई है कि इससे कोरियाई प्रायद्वीप में स्थायी शांति के एक नए दौर की शुरुआत होगी। चीन ने यह भी कहा कि अब उत्तर कोरिया को प्रतिबंधों से राहत देने पर विचार होना चाहिए। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों में कहा गया है कि अगर उत्तर कोरिया प्रस्तावों के अनुसार बर्ताव करता है तो प्रतिबंधों को निलंबित या हटाने समेत इन्हें नियोजित किया जा सकता है। चीन दुनिया भर में अलग-थलग पड़े उत्तर कोरिया का इकलौता बड़ा सहयोगी देश है। दूसरी ओर रूस ने भी इस शिखर वार्ता का स्वागत किया है।

रूस के उप विदेश मंत्री सर्गेई रियाबकोव ने कहा कि कोरियाई प्रायद्वीप को पूरी तरह परमाणु मुक्त करने के लिए हुए समझौते को अमल में लाने की दिशा में रूस सहयोग करने के लिए तैयार है। जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने दोनों नेताओं के संयुक्त बयान का स्वागत किया और कहा कि यह उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार छोडऩे की दिशा में पहला कदम है। संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था इंटरनेशनल एटामिक एनर्जी एजेंसी (आइएईए) के महानिदेशक युकिया अमानो ने कहा कि संयुक्त बयान का स्वागत योग्य है। आइएईए उत्तर कोरिया में किसी भी तरह का सत्यापन करने के लिए तैयार है। यूरोपीय यूनियन ने ट्रंप-किम मुलाकात की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह शिखर वार्ता अंतर कोरियाई संबंधों के लिए महत्वपूर्ण और जरूरी कदम है।

भारत ने बातचीत को सकारात्मक बताया
भारत ने ट्रंप और किम जोंग के बीच शिखर वार्ता का स्वागत किया है और इसे सकारात्मक घटनाक्रम करार दिया। विदेश मंत्रालय ने उम्मीद जाहिर की कि उत्तर कोरिया प्रायद्वीप से जुड़ा कोई भी प्रस्ताव भारत के पड़ोस में प्योगयांग के परमाणु प्रसार संबंधी चितांओं को दूर करेगा। इसका परोक्ष आशय पाकिस्तान के संदर्भ में माना जा रहा है। भारत काफी समय से इस बात की मांग कर रहा है कि भारत के पड़ोस में उत्तर कोरिया के परमाणु प्रसार संबंधों की जांच की जाए। मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि भारत कोरियाई प्रायद्वीप में बातचीत और कूटनीति के जरिये शांति और स्थिरता के प्रयासों का हमेशा से समर्थन करता रहा है। इसमें कहा गया है कि हम उम्मीद करते हैं कि इस वार्ता से कोरियाई प्रायद्वीप में स्थायी शांति और स्थिरता का मार्ग प्रशस्त होगा। इसमें हमारे पड़ोस में परमाणु प्रसार संबंधी हमारी चिंताओं को ध्यान में रखा जाएगा।

दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का न्योता स्वीकारा
ट्रंप व किम की वार्ता का एक उल्लेखनीय पहलू यह रहा कि दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को अपने देश की यात्रा का निमंत्रण दिया। शिखर वार्ता के दौरान किम ने ट्रंप को प्योंगयांग आने का न्योता दिया। इसके साथ ही किम ने अमेरिका की यात्रा करने पर भी सहमति जताई है। सरकारी केसीएनए न्यूज एजेंसी का कहना है कि किम ने ट्रंप को सुविधाजनक समय पर प्योंगयांग की यात्रा करने का निमंत्रण दिया है जबकि ट्रंप ने भी किम जोंग उन को अमेरिका आने के लिए आमंत्रित किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों नेताओं ने खुशी-खुशी एक-दूसरे के निमंत्रण स्वीकार कर लिए है और इस बात को भी माना है कि यह दोनों देशों के रिश्तों में सुधार के लिए एक और मौका देगा। केसीएनए का कहना है कि दोनों नेताओं की बातचीत से दुनिया में व्यापक बदलाव को बढ़ावा मिलेगा।

किम ने बरती सतर्कता, पोर्टेबल टॉयलेट लेकर पहुंचा सिंगापुर

सिंगापुर में किम जोंग की सुरक्षा को लेकर उत्तर कोरिया ने खास सतर्कता बरती। किम जोंग को सिंगापुर ले जाने के लिए उत्तर कोरिया से तीन अलग-अलग विमानों ने एक-एक घंटे के अंतराल पर उड़ान भरी, लेकिन किसी को भी इस बात की खबर नहीं थी कि किम जोंग किस विमान में हैं। किम जोंग की बहन यो-जोंग भी सोवियत-एरा के एक विमान में सिंगापुर पहुंचीं। उत्तर कोरिया के एक अधिकारी के मुताबिक दोनों देशों के बीच होने वाली बैठक को लेकर काफी तनाव था। इसी कारण इस बात को पूरी तरह से गुप्त रखा गया कि किम जोंग किस विमान में हैं या वो कैसे सिंगापुर पहुंच रहे हैं। पहला विमान किम जोंग लिए खाने-पीने की चीजें, बुलेटप्रूफ लिमोजिन गाड़ी व पोर्टेबल टॉयलेट लेकर सिंगापुर पहुंचा। पोर्टेबल टॉयलेट इसलिए ले जाया गया था ताकि किम जोंग के स्टूल (मल) की किसी तरह के जांच न की जा सके या उस पर किसी तरह का परीक्षण न किया जा सके। इसके पीछे वजह यह है कि किम के स्वास्थ्य की जानकारी बिल्कुल बाहर नहीं आती। पहले भी किम की बीमारियों को लेकर चर्चा होती रही है। लेकिन, अब स्टूल की जांच होने के डर से साफ है कि उत्तर कोरिया नहीं चाहता कि किम के स्वास्थ्य की जानकारी किसी को भी लगे। सुरक्षा कारणों से किम जोंग ने शंघाई होकर सिंगापुर की यात्रा नहीं की, क्योंकि ये रास्ता समुद्र के ऊपर से होकर जाता है। इसके बजाय किम ने बीजिंग होकर सिंगापुर की यात्रा की, जिसमें 10 घंटे लगे और खर्च भी काफी हुआ।