बरमूडा ट्राइएंगल: आखिर यह रहस्य क्या है। इतने आगे बढ़ चुकी वैज्ञानिक दुनिया का यह कौन सा तिलिस्म है। इस जगह से 2000 जलपोत और 75 हवाई जहाज गायब हो चुके। कहाँ गए ,कुछ पता ही नहीं चला। उनके मलबे तक का पता नहीं चल सका। कोई इसे शैतानी तिकोना कहता है तो कोई इस जगह को किसी चमत्कारी शक्ति का निवास बताता है। अटलांटिक महासागर में तिकोनी सी इस जगह का रहस्य आखिर पता क्यों नहीं चल पा रहा।

चार्ल्स बर्लिट्ज़ की किताब से हुई चर्चा

दुनिया अब इस तिकोने को बरमूडा ट्राइएंगल कहती है। इस नाम को प्रसिद्धि तब मिली जब चाल्र्स बार्लिट्ज की लिखी किताब ‘बरमूडा ट्राएंगल’ 1974 में प्रकाशित हुई। इस किताब में लेखक ने अमेरिकी नौसेना के लड़ाकू विमानों फ्लाइट 19 समेत कई विमानों और जलपोतों के गायब होने की घटनाओं का जिक्र किया था।‘बरमूडा ट्राएंगल’ शब्द 1964 और 1974 के बीच सर्वाधिक चर्चित हुआ।

भूगोल को ठीक से समझ लेना बहुत जरुरी 

अब यह जान लेना जरुरी है कि इस तिकोनी जगह का वास्तविक भूगोल क्या है। इसके भूगोल को ठीक से समझ लेना बहुत जरुरी है। ग्लोब बता रहा है कि यह तिकोना क्षेत्र फ्लोरिडा की खाड़ी, बहमास और पूरे कैरीबियन आईलैंड के साथ पूर्व में अटलांटिक महासागर के अजोरेस तक फैला है। हालांकि इस क्षेत्र की सबसे प्रचलित वाह्य सीमा को अटलांटिक महासागर के तट मियामी, सैनजुआन, प्यूर्टो रिको और मध्य अटलांटिक के आइलैंड बरमूडा को माना जाता है। कहा जाता है कि यह दुनिया के सबसे व्यस्ततम समुद्री जहाजों और विमानों के रास्ते में से एक है।

क्रिस्टोफर कोलंबस को हुआ था आभास 

सबसे पहले इस शैतानी तिकोने का आभास क्रिस्टोफर कोलंबस को हुआ। 11 अक्टूबर 1492 को अपने दल के साथ यात्रा के दौरान कोलंबस को इस क्षेत्र में अजीबोगरीब विसंगतियां दिखीं। अपने लॉगबुक में उन्होंने लिखा कि यात्रा के दौरान दल के सभी साथियों को इस क्षेत्र में आसमान में प्रकाश पुंजों के नृत्य जैसा दृश्य दिखा। इसके बाद उन्होंने लिखा था कि इस क्षेत्र में कंपास यंत्र विचित्र तरीके का व्यवहार कर रहा था।

कई तरह की अवधारणाएं

अभी तक इस जगह को लेकर जो अवधारणा रही  कहा जाता रहा है कि यहाँ के विशिष्ट चुम्बकीय क्षेत्र में कोई भी पिंड आते ही लापता हो जाता है। कई बार तो यह कहा गया कि मानवीय भूल के कारन इस जगह से पोत या जहाज गायब हुए। कई बार जलदाकुओ को इसका कारन बताया जाता रहा। कैरेबियाई क्षेत्रों में जल दस्यु समस्या 1560 से चलती आ रही है। कई लोगों का मानना है कि ये समुद्री लुटेरे जलपोतों को बंधक बनाकर लूटमार करने के बाद डुबो देते हैं। कंपास यंत्र के विचित्र व्यवहार पर कई लोगों ने इस क्षेत्र में असामान्य चुंबकीय क्षेत्र की परिकल्पना भी की।

तीन सदियों का रहस्य सुलझा लेने का दावा

पिछले तीन सदियों से वैज्ञानिकों का सिरदर्द बनी इस रहस्यमय  पहेली को अब सुलझा लेने का दावा किया जा रहा है। अब यूनिवर्सिटी ऑफ साउथैंपटन के विज्ञानियों का कहना है कि यहां घटने वाली हर अनहोनी के पीछे तूफानी लहरें हैं। तीनों दिशाओं से उठने वाली 30 मीटर ऊंची लहरें जब आपस में टकराती हैं तो बड़े से बड़ा जहाज भी विवश हो जाता है। उनके अनुसार अटलांटिक के इस तिकोने क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से तीनों तरफ से तूफानी लहरें उठती हैं। जब ये आपस में मिलती हैं तो आकार- प्रकार विकराल और भयावह हो जाता है। इसके लिए उन्होंने चैनल 5 के लिए बनायी गई एक डॉक्युमेंट्री में पूरी घटना को होते हुए दिखाया। इसके तहत यूएसएस साइक्लोप्स जलपोत का मॉडल तैयार किया गया। 1918 में यह अमेरिकी युद्धपोत बरमूडा ट्राएंगल क्षेत्र में समाधिस्थ हो गया था। घटना में तीन सौ लोग मारे गए थे।