बहरे हो गये अमेरिकी डिप्लोमैट, क्यूबा दूतावास छोडऩे का आदेश

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वाशिंगटन। क्यूबा में अमेरिकी दूतावास कर्मियों पर लगातार हमले हो रहे हैं। ऐसे में अमेरिका ने क्यूबा स्थित अपने दूतावास के लगभग आधे कर्मचारियों को स्वदेश बुला लिया है। साथ ही अमेरिकियों को चेतावनी दी है कि क्यूबा न जाएं। दरअसल, पिछले कुछ समय से क्यूबा में रहस्यमय हमले के कारण अमेरिकी राजनयिकों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा है। कई राजनयिकों की सुनने की शक्ति ही हमेशा के लिए चली गई है। इसके अलावा भी राजनयिकों को कई अजीब-अजीब परेशानी हो रही है। इसे देखते हुए अमेरिका ने अपने राजनयिकों को क्यूबा छोडऩे का आदेश दिया है।

क्यूबा में अमेरिकी दूतावास में काम कर रहे 21 लोगों की तबीयत खराब होने की पुष्टि की गई है। इनमें से कुछ की सुनने की क्षमता बहुत कम हो गई है। इसके अलावा कुछ को जी मिचलाना, सिरदर्द और कान में सीटी बजने की समस्या सामने आई है। वहीं कुछ लोगों की एकाग्रता या याददाश्त में कमी की बात भी सामने आ रही है।

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जांचकर्ताओं के अनुसार स्वास्थ्य संबंधी समस्यायें उन ‘सोनिक वेव’ मशीनों के कारण हो सकती हैं जो दूतावास कर्मियों के घरों में इस्तेमाल होती हैं। दरअसल, अजीब-सी आवाजें कुछ ही कमरों में सुनने को मिलीं। इसे सोनिक अटैक का नाम दिया जा रहा है। कनाडा की सरकार ने भी कहा है कि उसके कम से कम एक राजनयिक का रहस्यमयी लक्षणों के कारण इलाज किया गया है।

हालांकि क्यूबा ने इन घटनाओं में किसी भी तरह से शामिल होने की बात से इनकार किया है। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने क्यूबा के साथ लगभग पचास साल के बाद कूटनीतिक संबंध स्थापित किये थे। उनके प्रयासों की वजह से ही 2015 में अमेरिका के दूतावास ने वहां काम करना शुरू किया। अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओबामा के कुछ फैसलों को वापस ले लिया है, लेकिन हवाना में दूतावास अभी भी काम कर रहा है। हालांकि अब लगता है कि यह दूतावास भी जल्द बंद कर दिया जाएगा।

पिछले हफ्ते अमरीका ने क्यूबा के 15 राजनयिकों को निष्कासित कर दिया। अमरीका का कहना है कि क्यूबा की सरकार हवाना में अमरीकी राजनयिकों पर हो रहे रहस्मयी हमलों को रोकने में नाकाम रही है। क्यूबा के राजनयिकों को सात दिन के अंदर अमरीका छोडऩे के लिए कहा गया है।

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अमरीका के विदेश मंत्रालय का कहना है कि अंतिम मामला अगस्त के अंत में सामने आया था, उसके बाद किसी की चिकित्सकिय पुष्टि नहीं हुई है। सितंबर के आरंभ में अमरीका ने कहा था कि अगस्त में एक और घटना हुई है, जबकि पहले वह कह चुका था कि ऐसे मेडिकल हमले रुक गए हैं। नए मामलों का पता चलने के बाद प्रभावितों की संख्या और भी बढ़ सकती है।

अमरीकी विदेश सेवा संगठन ने कहा है कि कुछ मामलों में बहरापन भी देखा गया है और इसके अलावा मस्तिष्क में सूजन, सिर में तेज दर्द, असंतुलन और संज्ञान खोने जैसे लक्षण भी देखे गए हैं। इन हमलों की शुरुआत 2016 के अंत में हुई थी। अमरीकी जांचकर्ताओं का कहना है कि उनके राजनयिकों पर सीक्रेट सोनिक हमले किए जा रहे हैं। यानी उनके राजनयिकों को एक ऐसे उपकरणों से निशाना बनाया जा रहा है जिसकी कोई आवाज नहीं होती लेकिन वह अपने आसपास के लोगों के कानों पर बहुत बुरा असर डालता है। ऐसा माना जा रहा है कि ऐसे उपकरण अमरीकी राजनयिकों के घर के बाहर और अंदर छोड़ दिए गए हैं।

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प्रदीप कुमार पाल गत 09 वर्षों से पत्रकारिता जगत में कार्यरत हैं। इन्होने हिन्दी दैनिक ‘लोकमत’ से उप सम्पादक के रूप में अपना पत्रकारिता का कॅरियर प्रारम्भ किया था। इसके बाद हिन्दी दैनिक ‘हाईटेक न्यूज’, ‘अवधप्रान्त’ में वरिष्ठ उप सम्पादक के पद पर कार्यरत रहे हैं। साप्ताहिक हिन्दी अखबार एवं मासिक पत्रिका ‘ग्राम्य संदेश’ में प्रदीप ने मुख्य समाचार सम्पादक के पद पर कार्य किया है। अखबार के अलावा प्रदीप कई अन्य पाक्षिक एवं मासिक पत्रिकाओं में भी कार्यरत रहे हैं। एक वर्ष की रिपोर्टिंग के साथ-साथ प्रदीप को डेस्क के कार्य का अच्छा अनुभव है।