यूपी के 8000 फार्मासिस्ट हड़ताल पर, मरीज़ हुए बेहाल

डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश के बैनर तले प्रदेश भर में राजकीय चिकित्सालयों, मेडिकल कॉलेजों, स्वास्थ्य केंद्रों, कारागार में तैनात करीब 8000 फार्मासिस्टों ने आज गुरुवार को दो घंटे का कार्य बहिष्कार किया।

लखनऊ: प्रदेश के सभी 75 जिलों में 14 सूत्रीय मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन के तहत आज फार्मासिस्टों ने दो घंटे का कार्य बहिष्का‍र किया। जिससे मरीज़ों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा।

डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश के बैनर तले प्रदेश भर में राजकीय चिकित्सालयों, मेडिकल कॉलेजों, स्वास्थ्य केंद्रों, कारागार में तैनात करीब 8000 फार्मासिस्टों ने आज गुरुवार को दो घंटे का कार्य बहिष्कार किया।

शहरी क्षेत्रों के चिकित्सालयों में सुबह 8 से 10 बजे तक और ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह 10 से 12 बजे तक कार्य बहिष्कार किया गया है। इस दौरान मरीजों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दवा के लिए दो घंटे तक उन्हें इंतजार करना पड़ा।

कल होगी और परेशानी
हालांकि एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मरीजों को होने वाली दिक्कतों के लिए अपनी मजबूरी जताते हुए यह कहा है कि वह मरीजों को दो बजे के बाद भी दवा बाटेंगे, लेकिन दो घंटे के कार्य बहिष्काहर से मरीज़ों का जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई कैसे होगी। कल भी कमोबेश यही हाल रहेगा। ऐसे में मरीज़ों को कल भी परेशानियों से दो चार होना पड़ेगा।

शनिवार को माह के दूसरे शनिवार होने के कारण फार्मासिस्टो छुट्टी पर रहेंगे, और उसके बाद सोमवार यानी 10 दिसम्बहर से बेमियादी हड़ताल होने के बाद मरीजों को कई तकलीफों का सामना करना पडेगा।

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75 जिलों में जारी है आंदोलन
मरीजों की दिक्कोतों का हवाला देते हुए जब प्रवक्ता तथा राजकीय फार्मेसिस्ट महासंघ के अध्यक्ष सुनील यादव से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हमें इस बात का दुख है कि मरीजों को असुविधा हो रही है लेकिन हम फार्मासिस्टों की मजबूरी है कि मुख्यमंत्री के आश्वासन के बावजूद मांगों पर कार्यवाही न होने के कारण हमें आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि जितनी जल्दी शासन-प्रशासन हमारी मांग लेगा उतना ही बेहतर रहेगा।उन्होंने कहा कि हमारी मांगें जायज हैं, और लम्बे समय से लंबित हैं, कार्य करते हुए हमने जो भी आंदोलन किया उसके द्वारा बराबर शासन-प्रशासन अवगत होता रहा है लेकिन कोई सकरात्मक कदम न उठाये जाने से फार्मासिस्टों में रोष व्याप्त है, और इसी रोष का परिणाम है कि प्रदेश से सभी 75 जिलों में आंदोलन पूरी तरह से जारी है।

यादव ने कहा कि दो घंटे का कार्य बहिष्कार कल 7 दिसम्बर को भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा है कि फार्मासिस्टों की जायज मांगों को राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्त‍र प्रदेश का पूरा समर्थन प्राप्त है, यही नहीं परिषद के अध्य्क्ष अतुल मिश्र ने कहा है कि मांगें पूरी न किये जाने की स्थिति में फार्मासिटों की 10 दिसम्बर से प्रस्तावित हड़ताल को पूरा समर्थन दिया गया है, और इस हड़ताल में प्रदेश भर के कर्मचारी भी शामिल हो जायेंगे।

उन्होंने यह भी बताया कि 14 सूत्रीय माँगों के समर्थन में डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोसिएशन उत्तर प्रदेश द्वारा 15 नवम्बर को महानिदेशालय का घेराव किया था, लेकिन अब तक कोई निर्णय या कार्यवाही नहीं हुई।

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क्या हैं मांगें
मांगों के बारे में सुनील यादव ने बताया कि पूर्व में हुए उच्चस्तरीय समझौतों और अनेक वार्ताओं में लिये निर्णयों के बावजूद संघ की किसी भी मांग पर कोई कार्यवाही नही हो रही है। संघ की वेतन विसंगति की रिपोर्ट शासन में लंबित है। जिसके कारण सम्मानजनक वेतन नहीं मिल रहा, समझौते के अनुसार प्रत्येक जिले में जिला फार्मेसी अधिकारी के पद सृजित होने थे, 28 विशेष कर अधिकारी, 4 संयुक्त निदेशक के पदों के सृजन पर भी शासन और महानिदेशालय स्तर पर सहमति बन चुकी है जिसकी कार्यवृति फाइलों में धूल खा रही है।

विभाग में पदोन्नति के पदों को बढ़ाकर पिरामिड ठीक करने की सहमति बन चुकी है लेकिन लगभग 10 साल बीतने के बाद भी इस पर अभी तक कोई कार्यवाही नही हुई । जिससे अधिकांश फार्मेसिस्ट अपने मूल पद से सेवानिवृत्त हो जाते है, उनकी पदोन्नति नही हो पाती।

तकनीकी डिप्लोमा के बावजूद फार्मेसिस्ट को अभी भी प्रारंभिक ग्रेड पे 2800 ही मिल रहा है, जबकि अन्य समकक्ष कर्मियों को 4200 या 4600 ग्रेड पे दिया जा चुका है। प्राप्त हो रहे भत्तो का वर्षो से पुनरीक्षण नही हुआ।

पेशेंट केयर भत्ता प्रदेश में नही दिया गया। पदों का पुनर्गठन नहीं  हो रहा, मानक निर्धारण, पदों का सृजन लंबित है, ट्रामा सेंटरों में अभी तक फार्मेसिस्ट के एक भी पद सृजित नहीं हुए, उच्च पदों का सृजन भी नही हो रहा है जिससे पदोन्नति नही हो पा रही, नियुक्ति प्रक्रिया भी बाधित है।

500 से अधिक पद हैं खाली
यादव ने बताया कि फार्मेसिस्ट के 500 से अधिक पद रिक्त हैं जबकि महानिदेशालय के पास सही सूचना नहीं है, फार्मेसिस्ट रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं । उन्होंने कहा कि नवनियुक्त फार्मेसिस्ट उच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में पुरानी पेंशन योजना के हकदार हैं परंतु उन्हें नई पेंशन योजना में रखा जा रहा है, लगभग 4000 से अधिक नवनियुक्त फार्मेसिस्टों के नाम वरिष्ठता सूची में नही जोड़े गए।

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