एक परिचय

महंत देव्यागिरि राजधानी लखनऊ समेत आसपास के कई जिलों में एक सुपरिचित चेहरा हैं। 15 जून 1977 को बाराबंकी में जन्मीं देव्यागिरि ने बायलॉजी से बीएससी करने के साथ ही पैथोलॉजी में डिप्लोमा भी हासिल किया लेकिन उनका मन सांसारिकता में नहीं रमा। उनकी मुलाकात महंत केशव गिरि से हुई। आध्यामिक जगत में ही रमने की इच्छाशक्ति प्रबल होने पर देव्या गिरि ने 10 जनवरी 2002 को उन्होंने संन्यास की दीक्षा ले ली और 9 सितंबर 2008 को वह मनकामेश्वर मंदिर की महंत बना दी गईं।

संन्यास लेने के बावजूद वह सामाजिक कार्यों से निरंतर जुड़ी रहीं। सामाजिक क्षेत्र में उन्होंने अनेक अभियानों में भागीदारी की। गोमती आरती की निरंतरता बनाए रखने के साथ ही उसकी स्वच्छता के लिए लगातार काम कर रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में तालाबों, नदियों की सफाई के साथ ही अन्य स्वच्छता कार्यक्रमों में भी वह जुड़ी हुई हैं। लखनऊ समेत आसपास के जिलों में शायद ही कोई धार्मिक और सामाजिक आयोजन हों, जहां उनकी भागीदारी न रहती हो। यही वजह है कि सरकार भी उन्हें अपने कार्यक्रमों में आगे रखती है।

कन्या रक्षा, और सामूहिक विवाह के अनेक कार्यक्रम वह निरंतर आयोजित कराती हैं और इसके लिए लोगों को प्रेरित भी करती हैं। आत्मरक्षा के लिए लड़कियों को ताइक्वांडो का प्रशिक्षण भी दिलाती रहती हैं। मनकामेश्वर मंदिर की ओर से गरीब बच्चों को संस्कारव नैतिक शिक्षा भी वह नि:शुल्क दिलाती रहती हैं। इसके अलावा बाढ़, भूकंप और अन्य प्राकृतिक आपदाओं में पीडि़तों की मदद के अभियानों में उनकी सक्रिय भागीदारी रहती है।