लखनऊ : इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू), क्षेत्रीय केंद्र, लखनऊ तथा जनजाति एवं लोक कला संस्कृति संरक्षण संस्थान, उप्र के संयुक्त तत्वाधान में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ, जिसका विषय- थारू जनजाति विकास – चुनौतियां, सम्भावनाएं एवं समाधान था। इस कार्यशाला के मुख्य अतिथि चन्द्रराम चौधरी, अध्यक्ष, लोक एवं जनजाति कला संस्कृति संस्थान, उप्र रहे। यह संस्थान संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के आधीन एक स्वायत्तशासी संगठन है। इस कार्यशाला में थारू जनजाति के लगभग 250 लोगों ने भाग लिया एवं थारू गीत व नृत्य की प्रस्तुति दी। इस कार्यक्रम में पीलीभीत, लखीमपुर, गोरखपुर, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, बहराईच आदि जनपदों से थारू जनजाति के लोगों ने प्रतिभाग किया।

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डाॅ कीर्ति विक्रम सिंह, सहायक क्षेत्रीय निदेशक, इग्नू क्षेत्रीय केंद्र ने कहा कि इस कार्यशाला का आयोजन थारू जनजाति के उत्थान को अवरूद्ध करने वाली चुनौतियों के बारे में चर्चा करना है और साथ-ही-साथ इन चुनौतियों को दूर करने के लिए रणनीतियां बनाना एवं समाधान खोजना है। उन्होंने इग्नू द्वारा थारू जनजाति के शैक्षणिक उन्नयन हेतु किये जा रहे प्रयासों की चर्चा की और कहा कि शिक्षा के द्वारा ही अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य सुविधावंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है।

डाॅ मनोरमा सिंह, क्षेत्रीय निदेशक, इग्नू क्षेत्रीय केन्द्र, लखनऊ ने अपने उद्बोधन में कहा कि विश्वविद्यालय ने थारू जनजाति के शैक्षणिक उन्नयन हेतु अपने सभी कार्यक्रमों को निःशुल्क कर दिया है। इस जनजाति के लिए प्रमाण-पत्र, डिप्लोमा, स्नातक स्तर व बी.पी.पी. के कार्यक्रम शामिल हैं जोकि उच्चकोटि के एवं रोजगारोन्मुख हैं। उन्होनें बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा संचालित बी.पी.पी. कार्यक्रम में थारू समाज का को भी व्यक्ति, जिसने कोई भी औपचारिक शिक्षा प्राप्त न की हो, परन्तु 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका हो, इस कार्यक्रम में अपना नामांकन करा सकता है और इसे उत्तीर्ण करने के उपरान्त उसका नामांकन इग्नू के स्नातक स्तर के कार्यक्रम में हो जाता है।

इस कार्यशाला के मुख्य अतिथि चन्द्रराम चौधरी, अध्यक्ष, लोक एवं जनजाति कला संस्कृति संस्थान, उप्र ने अपने उद्बोधन में संस्थान द्वारा जनजाति एवं लोक कला संस्कृति के संरक्षण के लिए भविष्य में किये जाने वाले कार्यों के बार में विस्तार से बताया, उन्होनें कहा कि आज की इस कार्यशाला की जो खास बात है वो यह है कि थारू जनजाति के विकास एवं उनके सांस्कृतिक संरक्षण की रणनीतियां इसी समाज के लोग मिलजुल कर तय कर रहे हैं, जो कि किसी भी कार्य को करने की लोकतांत्रिक पद्धति है। उन्होनें इग्नू द्वारा थारू एवं अन्य जनजातियों के शैक्षणिक उत्थान हेतु किये जा रहे प्रयासों की सराहना की।