अखिलेश को एयरपोर्ट पर रोके जाने का मामला, राज्यसभा के बाद विधानसभा में भी हंगामा

विधानसभा में मंगलवार को समाजवादी पार्टी के राष्टीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को राजधानी लखनऊ स्थित चौ. चरण सिंह एयरपोर्ट पर रोके जाने के मामले को लेकर विपक्ष ने सदन में हंगामा किया। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी जिसके कारण प्रश्नकाल हंगामे की भेंट चढ गया।

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लखनऊ: विधानसभा में मंगलवार को समाजवादी पार्टी के राष्टीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को राजधानी लखनऊ स्थित चौ. चरण सिंह एयरपोर्ट पर रोके जाने के मामले को लेकर विपक्ष ने सदन में हंगामा किया। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी जिसके कारण प्रश्नकाल हंगामे की भेंट चढ गया। 12ः30 बजे जब सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तब भी विपक्ष कुछ भी सुनने को जब तैयार न हुआ तो सत्ता पक्ष ने अपने विधायी कार्य निपटाए और इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष हदयनारायण दीक्षित ने सदन की बुधवार तक के लिए स्थगित करनी दी।

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विधानसभा की कार्यवाही आज सुबह 11 बजे प्रश्नकाल के साथ प्रारम्भ हुई तो इसी बीच समाजवादी पार्टी के सदस्य नरेन्द्र सिंह वर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है और समाजवादी पार्टी के राष्टीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को लखनऊ स्थित एयरपोर्ट पर रोक लिया गया है। अखिलेश यादव प्रयागराज में छात्रसंघ के एक कार्यक्रम में सम्मिलित होने जा रहे थें।

इस पर विधानसभा अघ्यक्ष हदयनारायण दीक्षित ने कहा कि अभी कांग्रेस सदस्य अजय कुमार लल्लू के सवाल का जवाब संसदीय कार्यमंत्री दे रहे हैं इसलिए इस मामले को बाद में उठाया जाए। पीठ से इस निर्देश के अवहेलना करते हुए सपा सदस्य वेल में आकर हंगामा करने के साथ ही सरकार विरोधी नारेबाजी करने लगे। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि इस तरह की गतिविधियों से क्या लोकतंत्र बच जाएगा।

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लगातार हो रहे हंगामे को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही 20 मिनट के लिए स्थगित कर दिया। बाद में यह स्थगन 12 बजकर 20 मिनट तक बढा दिया गया। इसके बाद 10 मिनट के लिए सदन का स्थगन और बढा दिया गया। इसके बाद 12 बजकर 30 मिनट पर सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो विधानसभाअध्यक्ष ने कहा कि जब सदन अव्यवस्थति है तो विपक्षी सदस्यों के विचार सदन में कैसे आ सकते हैं। इस पर बहुजन समाज पार्टी के दलीय नेता लालजी वर्मा ने समाजवादी पार्टी के सदस्यों का समर्थन करते हुए कहा कि लोकतंत्र में सबको बोलने का अधिकार है। अभी तक देश में हिटलरशाही चल रही थी लेकिन अब उत्तर प्रदेश में भी हिटलरशाही चल रही है।

अध्यक्ष ने दोबार विपक्षी सदस्यों से अनुरोध किया कि वह अपने आशन पर चले जाए लेकिन समाजवादी पार्टी के सदस्य कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थें। इस दौरान वह सरकार विरोध नारेबाजी करते रहे। इसी बीच बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस के सदस्य भी सपा सदस्यों का साथ देते हुए वेल में आ गये जिसके बाद सम्पूर्ण विपक्ष वेल मे आ गया। संसदीय कार्यमंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि प्रयागराज में विश्वविद्यालय छात्रसंघ का कार्यक्रम था जिसमें समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को कार्यक्रम में जाना था। मगर छात्रगुटों में आपसी तनाव को देखते हुए जिलाधिकारी प्रयागराज ने सोमवार को ही अखिलेश यादव को वहां जाने से मना किया गया था।

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स्थानीय प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अखिलेश यादव के प्रयागराज जाने से कानून व्यवस्था बिगड सकती है। श्री खन्ना ने कहा कि यह बात अखिलेश यादव को बताई गयी थी कि उनका वहां जाना उचित नहीं है। इसके बाद भी संवैधानिक पद पर बैठने वाले अखिलेश यादव चै चरण सिंह एयरपोर्ट पर गए। उनके साथ अधिकारियों ने कोई गलत व्यवहार नहीं किया। श्री खन्ना ने कहा कि शांति व्यवस्था को बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसको बनाए रखने के लिए सरकार को जो कदम उठाने होंगे, सरकार कदम उठाएगी।

संसदीय कार्यमंत्री ने कहा कि विपक्षी दल के सदस्य नहीं चाहते है कि सदन की कार्यवाही हो सके। इसलिए इस तरह की गतिविधियां पैदा की जा रही है। इसी हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने विधानसभा की कार्यवाही बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी।इस पर संसदीय कार्यमंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा विपक्षी दलों की इस गतिविधि से लोकतंत्र गला घोंटने का काम किया जा रहा है। बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी अपने नारों में लोकतंत्र की दुहाई दे रहे हैं लेकिन उनके आचरण से लोकतंत्र का गला घोटने का काम किया जा रहा है। जनता ने इन दलों को सबक देने का काम किया है उसके बाद भी यह लोग सुधर नहीं रहे हैं।

इससे पहले सदन ने यह स्पष्ट किया कि सरकार वित्तविहीन विद्यालयों में शिक्षक एंव शिक्षकाओं को मानदेय नहीं देगी। प्रश्नकाल के दौरान समाजवादी पार्टी सदस्य शैलेन्द्र यादव उर्फ ललई ने सरकार से जानना चाहा कि प्रदेश में वित्त विहीन विद्यालयों में शिक्षक एवं शिक्षिकाओं को मानदेय देने की कार्यवाही लम्बित है इस पर सरकार क्या कार्यवाही की गयी।  जिस पर सरकार की तरफ से लिखित जवाब देते हुए बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि वित्त विहीन विद्यालयों में शिक्षक एवं शिक्षिकाओं को मानदेय देने की कोई नियमित व्यवस्था नहीं है।

अनुपूरक सवाल करते हुए संजय गर्ग ने कहा कि मानवीय दृष्टिकोण अपनाते सरकार को इस पर विचार किया जाना चाहिए। बसपा के वरिष्ठ सदस्य सुखदेव राजभर ने कहा कि वित्तविहीन शिक्षकों के कारण ही आज शिक्षण व्यवस्था पटरी पर चल रही है क्योंकि राजकीय विद्यालयों की संख्या इतनी अधिक नहीं है कि वह शैक्षिक कार्य को खत्म करें। इस पर संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि यह लोग जब विपक्ष में रहते हैं तभी यह बाते याद आती हैं। राज्य सरकार ने शिक्षा के बजट पर 60 हजार करोड रूपये खर्च किए है। साथ ही सरकार शिक्षा के बजट पर कोई कमी नहीं कर रही है।

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