….तो क्या भारत की इन जगहों पर रहते हैं एलियंस, यहां जानिए पूरा माजरा

....तो क्या इन जगहों पर रहते हैं एलियंस, यहां जानिए पूरा माजरा

....तो क्या इन जगहों पर रहते हैं एलियंस, यहां जानिए पूरा माजरा

लखनऊ: इस आधुनिक युग में धरती के बाहर की दुनिया के बारे में जानना इंसान के लिए एक जिज्ञासा का विषय रहा है। जिसके लिए विज्ञान ने बहुत मेहनत करके तरक्की हासिल की हैं। जिसकी वजह से इंसान आज आराम से धरती के बाहर जा सकता हैं। लेकिन अगर इंशान अपनी जिज्ञासा के लिए धरती के बाहर दूसरें गृह पर जा सकता हैं। तो दूसरे ग्रह के लोग भी धरती के ऊपर नजर रखते हुए वो हमारी दुनिया में आते हैं जिन्हें हम एलियंस कहते हैं।

यह भी पढ़ें: अयोध्या: मोरारी बापू ने हनुमान जी की मां अंजना को बताया अप्सरा

दोस्तों अपने एलियंस के बारे में सोचा हैं की वो कौन हैं, कहा रहते हैं, उनकी दुनिया कैसी होती होगी। इसके बारे में शायद ही कोई जनता होगा। क्यूकि आम लोगो ने तो एलियंस को मूवीस और TV सीरियल में देखा होगा या किसी किताब में ही पढ़ा होगा। जो दिखने में हम इंशानो से बिल्कुल अलग होते हैं।

यह भी पढ़ें: फुटवियर डिज़ाइन कोर्स में प्रवेश के लिए करें आवेदन

बता दे, एलियंस की दुनिया ऊपर असमान में हैं जो कभी कभी हमारी धरती पर भी आ जाते हैं। सर्च के मुताबिक, ये धरती के बहुत सी जगहों पर आते हैं। जिसमे से एक हमारा देश भी शामिल हैं हमारें देश में कई ऐसी जगह हैं जहां एलियंस आते हैं। और उन्हें एलियंस का घर भी कहां जाता है। तो आज हमको भारत की उन जगहों के बारे बताने जा रहे हैं जहां एलियंस आते हैं।

हिमालय

संसार की अधिकांश ऊंची पर्वत चोटियां हिमालय में ही स्थित हैं। और कुछ ऐसे स्थान जहां कोई नही आता जाता हैं। और कहा जाता हैं की हिमालय के कई पर्वतों के अंदर एलियंस का अंडरग्राउंड क्षेत्र है। सन 2010 में भारतीय सेना के यूनिट के मुताबिक जम्मू एंड कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र में कुछ स्पेन जैसी उड़ती चीजें देखने को मिली हैं और वहां के लोगो का भी यही कहना हैं। कि यहां पर एलियंस का अंडरग्राउंड क्षेत्र है और यह जगह एकदम अनजान होने के कारण यहां लगभग 100 सालों से एलियंस रहते हैं। उनका आना जाना हैं।

नयागढ़ ओडिशा

नयागढ़ ओडिशा का एक छोटा सा जिला है और यहा कुछ इलाका ऐसा है जहा कम ही लोग आते जाते है यह जिला उस समय चर्चा में आया जब 31 मई 1947 को यह कुछ स्थानीय लोगो ने यहा एक प्लेन के समान एक यान को उड़ते देखा जो बिल्कुल की एलियंस के  यान जैसा था और कहा जाता है कि कुछ दिन बाद अमेरिका की वायु सेना ने एक उड़नतश्तरी यान के जैसी एक चीज को बरामद करने का दावा किया था पर बाद में उन्होंने दावा झूठा करार कर दिया यह स्थान एलियंस का पुराने समय में घर हुआ करता था वह अपने यहां नहीं उतारते थे और इस बारे में यहां एक लेखक ने चित्र छापे पर हुए हैं।

नर्मदा घाटी

नर्मदा घाटी मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में स्थित है और कहा जाता है कि यह जगह दुनिया की कुछ विचित्र जगह में से एक है ये जगह सदा ही चर्चित रही है इस जगह पर डायनासोर के अंडे भी मिले थे और बड़े-बड़े जीवो पर कंकाल भी पाए जाते हैं कुछ लोगों का दावा है कि यहां एलियंस आते हैं और उनके कुछ सबूत भी मिले हैं क्योंकि यहां के आदिवासियों ने एलियन की यूएफओ की तस्वीरें बनाकर यान को वह दिखाइए और इसलिए यहां एक प्रयोगशाला बनाई गई है ताकि यहां एलियंस होने का पता लगाया जा सके और कुछ विज्ञानिकों ने यहां एलियंस होने की संभावना भी जताई है।

अजंता और एलोरा की गुफाए

इन गुफाओ के बारे में तो हमने किताबो में बहुत जानकारी प्राप्त करी है और ये दुनिया की प्रसिद्ध गुफाओ में से एक है  यहां कुल 29 गुफाएं है। अजंता की गुफाएं कोई आम गुफाएं नहीं है यह करीब आज से 4000 साल पहले बनाई हुई और इन गुफाओं को देखने बहुत ज्यादा पर्यटक आते हैं।

यह भी पढ़ें: J&K: श्रीनगर की जामिया मस्जिद में लहराए गए आईएस के झंडे

इन गुफ़ाओ में अच्छे-अच्छे कलाकारी की गई है और यह प्राचीन सभ्यता की एक बहुत ही महत्वपूर्ण निशानी है सुनने में आया है की इनगुफाओ को एलियंस का घर कहा जाता है। और कहा जाता है कि इन गुफाओं के अंदर नीचे अंडरग्राउंड एलियंस के रहने की व्यवस्था भी है। गुफाओं के अंदर एक कैलाश मंदिर भी है जिसको बनाने में कि एलियंस का हाथ था। क्योंकि 4000 साल पहले ऐसी कलाकारी शायद उस टाइम की सभ्यता नहीं बना सकती थी।

शोर टेम्पल महाबलीपुरम (तमिलनाडु)

शोर मंदिर महाबलीपुरम तमिलनाडु में स्थित है ये मंदिर गणेश भगवान का मंदिर है और यह समुंदर के किनारे स्थित है और यह बहुत ही भव्य मंदिर है जो बहुत ही पुराना है इस मंदिर की चोटी रॉकेट के अकार की बनाई गई है  कि इस मंदिर के बीच के अंदर एक होल बनाया गया है और यह इतना परफेक्ट है, कहा जाता है इस मंदिर को एलियंस ने बनाया था। क्योंकि इसके ऊपर जो आकृति बनाई  गई उसका आकार रॉकेट की तरह हैं वैज्ञानिक अंदाजा लगाते हैं कि उस समय में ऐसी आकृति नहीं बनाई जा सकती और जो बीच के अंदर एक मेनहोल बनाया गया वह बिल्कुल परफेक्ट है कहा जाता है कि वही से ही सीरियल रॉकेट लॉन्च करते थे।