पर्पल पेन और ‘जश्न ए अल्फाज़’, रचनाकारों को ‘साहित्य सेवी सम्मान’

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साहित्यिक ग्रुप ‘पर्पल पेन’ ने अपना द्वितीय वार्षिक उत्सव का शानदार आयोजन नयी दिल्ली में विष्णु दिगम्बर मार्ग स्थित ‘हिंदी भवन’ में किया। समारोह में पंजाब शिरोमणि विश्वविख्यात गज़लकार राजेद्रनाथ रहबर मुख्य अतिथि के रूप में, एवं आकाशवाणी के पूर्व महानिदेशक एवं प्रख्यात साहित्यकार लक्ष्मीशंकर वाजपेयी व मशहूर शायर मलिकज़ादा जावेद विशिष्ट अतिथि रहे।

‘पर्पल पेन’ में विशेष सक्रियता एवं साहित्यिक योगदान के लिए ‘साहित्य सेवी सम्मान’ से सम्मानित रचनाकारों में नीलोफर नीलू, वंदना गोयल व इंदिरा शर्मा जी रहे। साहित्यिक एवं मीडिया क्षेत्र के माध्यम से प्रचार प्रसार के लिए ‘साहित्य साधक सम्मान’ वरिष्ठ कवि अशोक कश्यप (संस्थापक, नवांकुर साहित्य सभा), ओम प्रकाश शुक्ल (संस्थापक,युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच), विजय कुमार दिवाकर (विजय न्यूज़) तथा सैफुद्दीन सैफी (संपादक,लोक जंग) को प्रदान किया गया।

इनके अलावा विशेष सहयोगिता के लिए दिनेश गोस्वामी को भी सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह के बाद दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, राजस्थान, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश से आये हुए लगभग 55 कवियों ने काव्यपाठ किया। जिनमें रामकिशोर उपाध्याय (युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच), त्रिभुवन कौल, सरेश पाल वर्मा जसाला, जगदीश मीणा, काली शंकर सौम्य, असलम बेताब, मंजू वशिष्ठ , विवेक आस्तिक, पुष्प लता, लोकेन्द्र मुद्गल, रतन राठौड़, चंद्र प्रकाश पारीख, विवेक चौहान, चंद्रकांता सिवाल, नीरजा मेहता, इब्राहीम अल्वी, ए.एस. खान, दिलदार देहलवी, शारदा मदरा, इंद्रा शर्मा, दिल्ली के छोटे उस्ताद शायर अभिषेक अम्बर और संजय कुमार गिरि आदि शामिल थे।

राजेन्द्र नाथ रहबर ने अपनी गज़ल कुछ इस अंदाज़ में कही –
‘जब भी हमें मिलो ज़रा हंस कर मिला करो
देंगे फकीर तुम को दुआएं नई नई।’

शायर मलिकज़ादा जावेद ने कुछ यूँ शेर कहा –
‘वतन से जो नहीं करते मुहब्बत, दिमागी तौर पर बीमार होंगे।’

लक्ष्मी शंकर वाजपयी ने अपनी कविता में पढ़ा –
‘कमरे में सजी
तुम्हारी बड़ी सी तस्वीर से
कहीं ज्यादा परेशान करती हैं !
बाथरूम में चिपकी
तुम्हारी छोटी-छोटी बिन्दिया।’

अभिषेक अम्बर ने सुनाया –
‘अब और अपने बारे में अम्बर मैं क्या कहूँ। मैं भी कमाल, मेरा दीवाना कमाल है।’

वर्तमान हालात पर संजय गिरि ने कहा –
‘खाना नहीं गरीब को भर पेट मिल रहा,
कैसे कहूँ गरीब की हालत बदल गई!’

कवि सुरेशपाल वर्मा जसाला ने सुनाया – ‘चकाचौंध में पलने वालों,अंधेरों का भी सम्मान करो।’
कवि जगदीश मीणा ने एक गीत पढ़ा –

‘सुबह सवेरे रात दोपहर ,हर पल तेरा ध्यान ,सजनी तुझ बिन मैं बेहाल …’
कार्यक्रम का संचालन कमल कांत शर्मा ने किया। सभी कवियों को उनके काव्य पाठ के लिए सम्मान पत्र भेंट किया गया तथा अंत में संस्थापिका वसुधा कनुप्रिया ने सभी अतिथियों एवं कवियों का आभार व्यक्त किया।

(प्रस्तुति – संजय कुमार गिरि)