कोल्ड स्टोरेज में आलू छोड़ने को मजबूर किसान, हमारी मानेंगे तो उगलेगा सोना

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लखनऊ : प्रदेश में आलू पैदा करने वाले किसान बेहाल हैं। किसानों के लिए सब से बड़ी परेशानी की वजह यह है कि उन्हें लागत से भी बहुत कम दाम मिल रहा है। अब परेशान हाल किसानों ने लाखों टन आलू कोल्ड स्टोरेज में छोड़ दिया है। क्योंकि उसे निकालकर मण्डी में बेचना घाटे का सौदा है। अब कोल्ड स्टोरेज मालिक नई फसल के लिए अपना कोल्ड स्टोरेज खाली करने के लिए आलू सड़कों पर फेंक रहे हैं।

पिछले साल 155 लाख टन आलू पैदा हुआ था। जिस में से 120 लाख टन आलू कोल्ड स्टोरेज में रखा गया। देश में पैदा होने वाले आलू का 40 फीसदी यूपी में पैदा होता है। सरकार ने पिछले साल 487 रुपये की दर से 10 लाख क्विंटल आलू खरीदने का लक्ष्य रखा था। लेकिन 12973 मीट्रिक टन ही आलू खरीदा जा सका। यानि लक्ष्य के मुक़ाबले सिर्फ 12 फीसदी ही खरीद हो सकी है।

यूपी में फिरोजाबाद, आगरा, अलीगढ़, इटावा, फर्रुखाबाद, कन्नौज, हाथरस, बाराबंकी, मैनपुरी में बड़े पैमाने पर आलू की खेती होती है। यहां आलू की अच्छी पैदावार के बाद किसानों ने फरवरी – मार्च में कोल्ड स्टोरेज में आलू रखा था। जिसे किसानो ने कोल्ड स्टोरेज से निकाला नहीं। अब फरवरी में आलू की नई फसल तैयार हो जाएगी। ऐसे में अपना कोल्ड स्टोरेज खाली करने के लिए कोल्ड स्टोरेज मालिक आलू फेंक रहे हैं।

दरअसल किसानों को कोल्ड स्टोरेज से आलू निकालना महंगा सौदा नजर आ रहा है। किसानों को प्रति कुंतल आलू कोल्ड स्टोरेज में रखने का किराया 250 रूपए से लेकर 275 रूपए तक चुकाना पडेगा। कोल्ड स्टोरेज तक ले जाने और फिर कोल्ड स्टोरेज से निकाल कर मण्डी तक ले जाने के लिए 90 रूपए से लेकर 110 रूपए ढुलाई का खर्चा आ रहा है। जबकि आलू की उत्पादन लागत 440 रूपए से लेकर 460 रूपए प्रति कुन्तल आई है।

यानि अगर किसान कोल्ड स्टोरेज से आलू निकाल मण्डी में ले जा कर बेचना चाहता है। तो उस की कुल लागत क़रीब 800 रुपया प्रति कुन्तल हो जाएगी। जबकि मण्डी में आलू की कीमत किसानों को महज 500 रूपए ही मिलेगी। यानि किसानो को मण्डी में ले जाकर आलू बेचने पर घाटा 300 रूपए से ज्यादा का होगा। अब इसी घाटे को कम करने के लिए किसानो ने आलू मण्डी में ले जा कर बेचने के बजाये कोल्ड स्टोरेज में ही छोड़ दिया हैं। क्योंकि इन हालात में किसानो का घाटा कम होकर 240 रुपये के आसपास रह जाएगा। यही वजह है, कि किसान आलू को कोल्ड स्टोरेज में छोड़ रहे हैं। और कोल्ड स्टोरेज मालिक आलू को सड़कों पर फ़ेंक रहे हैं, ताकि नई फसल के स्टोरेज के लिए जगह खाली हो जाए।

फरवरी में आलू की नई फसल तैयार होने को है। किसान तमाम अंदेशों को लेकर डरे हुए हैं। सलेमपुर गोसाईंगंज निवासी मुराद कहते है, कि पिछले बरस क़रीब 14 बीघा में आलू बोया था। फसल बहुत अच्छी हुई। लेकिन घाटा क़रीब डेढ़ लाख का हुआ। फसल इस बार भी अच्छी हुई है। जिस की वजह से उन्हें उम्मीद है, कि फायदा भले ना हो लेकिन घाटे की भरपाई ज़रूर हो जायेगी।

अब आलू किसानो के समर्थन में कांग्रेसियों ने राज्यपाल राम नाईक से मुलाक़ात कर आलू का मूल्य 1000 रुपया घोषित करने की मांग रखी है। कांग्रेस विधान मण्डल दल के नेता अजय कुमार लल्लू कहते हैं, कि आलू किसानों को राहत देने के लिए बिजली बिल माफ किया जाए। क्योंकि किसान कोल्ड स्टोरेज में रखा आलू भी नहीं बेच पा रहा है।

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