तीन तलाक पर किसी भी प्रकार का कानून पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप: उलेमा

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सहारनपुर: केंद्रीय कैबिनेट द्वारा तीन तलाक बिल संशोधन को मंजूरी दिए जाने पर उलेमा ने कहा कि तीन तलाक पर किसी भी प्रकार का कानून बनना मुस्लिम पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप है। सरकार हर चोर रास्तें से मुसलमानों को परेशान करने की राह ढुंढ़ रही है। हालांकि दारुल उलूम के मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी ने यह कहते हुए प्रतिक्रिया से इंकार कर दिया कि मामले की पूरी जानकारी होने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

लंबी बहस के बाद संशोधन को मंजूरी

तीन तलाक पर लम्बे समय से चल रही बहस के बाद केंद्रीय मंत्री मंडल ने गुरुवार को तीन तलाक बिल संशोधनों को मंजूरी दे दी है। हालांकि संशोधन के बावजूद भी यह गैर जमानती अपराध ही रहेगा लेकिन इसमें मजिस्ट्रेट को जमानत देने का हक होगा। बिल संशोधन में सरकार की नीयत पर सवार उठाते हुए उलेमा ने कहा कि जब बिल राज्य सभा में लंबित है तो ऐसे में सरकार को किस बात की जल्दबाजी है। दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि अभी उन्हें कैबिनेट के फैसले की पूरी जानकारी नहीं हैं। और जानकारी के बिना कुछ भी कहने उचित नहीं है। हालांकि उन्होंने दोहराया कि इस मामले में दारुल उलूम देवबंद मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ खड़ा है। दारुल उलूम वक्फ के शेखुल हदीस मौलाना अहमद खिजर मसूदी ने कहा कि तलाक-ए-बिद्दत (एक साथ तीन तलाक) के सम्बंध में लोकसभा में पारित हुए बिल को संशोधित कर सरकार ने इसे राज्यसभा में पास करने का रास्ता साफ किया है। उन्होंने सरकार की नियत पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार चाहती है कि मुस्लिम सड़कों पर उतरकर इसका विरोध करें ताकि असल मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके। मौलाना ने तीन तलाक के खिलाफ बनने वाले किसी भी कानून को मुस्लिम पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप करार दिया। तथा कहा कि सरकार पर्सनल लॉ में छेड़छाड कर संविधान विरोधी कार्य कर रही है जो कि उचित नहीं है।

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