SC के फैसले पर मायावती बोलीं- ‘मीडिया व बीजेपी के लोग कटी पतंग ना बनें तो बेहतर’

शनिवार को बसपा सुप्रीमो की तरफ से एक प्रेस रिलीज जारी किया गया। जिसमें मीडिया पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप भी लगाया है।

लखनऊ: सुप्रीम कोर्ट ने बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की सुप्रीमो मायावती के खिलाफ तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि उनके शासनकाल में पार्कों और मूर्तियों में जो पैसा खर्च हुआ है, उसे सरकारी खजाने में लौटाना चाहिए। उच्चतम न्यायालय की इस टिप्पणी के बाद बीएसपी सुप्रीमो ने शनिवार को अपनी प्रतिक्रिया दी है। मीडिया और बीजेपी के नेताओं को निशाने पर लेते हुए मायावती ने कहा कि मीडिया और बीजेपी के लोग कटी पतंग ना बनें।

शनिवार को बसपा सुप्रीमो की तरफ से एक प्रेस रिलीज जारी किया गया। जिसमें मीडिया पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप भी लगाया है। इसमें लिखा था ‘मीडिया कृपया माननीय सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को तोड़-मरोड़ कर पेश ना करे। माननीय न्यायालय में अपना पक्ष जरूर पूरी मजबूती के साथ आगे भी रखा जाएगा। हमें पूरा भरोसा है कि इस मामले में भी माननीय न्यायालय से पूरा इंसाफ मिलेगा। मीडिया और बीजेपी के लोग कटी पतंग ना बनें तो बेहतर है।’

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सरकार को स्मारकों से होती है आय: मायावती
इसके अलावा पार्कों के निर्माण को सही बताते हुए मायावती ने एक अन्य ट्वीट में लिखा,’सदियों से तिरस्कृत दलित व पिछड़े वर्ग में जन्मे महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों के आदर-सम्मान में निर्मित भव्य स्थल/स्मारक/पार्क आदि उत्तर प्रदेश की नई शान, पहचान व व्यस्त पर्यटन स्थल हैं, जिसके आकर्षण से सरकार को नियमित आय भी होती है।’

सुप्रीम कोर्ट ने की थी यह टिप्पणी
बता दें कि मायावती का यह बयान सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें कोर्ट ने मायावती को संबोधित करते हुए कहा था कि यूपी में सीएम रहते बीएसपी प्रमुख ने लखनऊ और नोएडा के पार्कों में अपनी और पार्टी के सिंबल हाथी की जो विशालकाय मूर्तियां बनवाई थीं, उन पर खर्च हुए सरकारी पैसे को सरकारी खजाने में लौटाना चाहिए। हालांकि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई वाली बेंच ने स्पष्ट किया इस पर कोई आदेश नहीं दिया है और कहा कि यह सिर्फ उनका एक विचार है।

करीब 2 हजार करोड़ रुपये का था प्रॉजेक्ट
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले के याचिकाकर्ता वकील रविकांत और सुकुमार के मुताबिक, मायावती ने इन प्रॉजेक्ट्स के लिए 2008-09 और 2009-10 के यूपी बजट से प्रॉजेक्ट के लिए करीब 2000 करोड़ रुपये आवंटित किए थे। इसमें जमीन की लागत भी शामिल थी।

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