लोकसभा चुनाव-2019 : क्या हार्दिक पटेल होंगे सपा-बसपा गठबंधन के उम्मीदवार!

गुजरात के पाटीदार आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल यूपी में सपा-बसपा गठबंधन के उम्मीदवार बनाये जा सकते है। साथ ही उन्हें वाराणसी में पीएम के खिलाफ चुनाव लड़ाया जा सकता है।

लखनऊ: यूपी में चल रही सपा – बसपा के संभावित गठबंधन की खबरों के बीच एक और बड़ी खबर आ रही है। सूत्रों के मुताबिक सपा और बसपा ने पीएम नरेंद्र मोदी को उनके ही गढ़ में घेरने की तैयारी लगभग पूरी कर ली है। गुजरात के पाटीदार आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल यूपी में सपा-बसपा गठबंधन के उम्मीदवार बनाये जा सकते है। साथ ही उन्हें वाराणसी में पीएम के खिलाफ चुनाव लड़ाया जा सकता है।
इधर यूपी में सपा-बसपा महागठबंधन की चर्चाओं के बीच शनिवार को अखिलेश यादव और मायावती की मुलाकात होगी।

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इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों नेता महागठबंधन के बारे में औपचारिक ऐलान कर सकते हैं। ऐसा इसलिए क्यों कि दोनों नेता साझा प्रेस कांफ्रेंस करेंगे। इसके लिए मीडियाकर्मियों को दोपहर 12 बजे यहां के होटल ताज में अखिलेश और मायावती की साझा प्रेस वार्ता को कवर करने का आमंत्रण दिया गया है। खास बात यह है कि आमंत्रण पत्र पर सपा की तरफ से राजेंद्र चौधरी और बीएसपी की तरफ से सतीश चंद्र मिश्रा के हस्तातक्षर हैं।

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37-37 सीटों पर लड़ेंगे चुनाव
आगामी लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 80 सीटों पर सपा-बसपा के मिल कर चुनाव लड़ने पर दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच ‘सैद्धांतिक सहमति’ बन गई है। सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजेन्द्र चैधरी ने पिछले शनिवार को बताया था कि गठबंधन को लेकर पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा प्रमुख मायावती के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है। इस कड़ी में पिछले शुक्रवार को भी दोनों नेताओं के बीच दिल्ली में मुलाकात हुई थी। उन्होंने कहा था कि आगामी लोकसभा चुनाव में गठबंधन को लेकर ‘सैद्धांतिक सहमति‘ बन चुकी है।

कांग्रेस को गठबंधन में शामिल किये जाने की संभावना पर चौधरी ने कहा था कि इसका निर्णय तो अखिलेश और मायावती ही लेंगे। बहरहाल, कांग्रेस के शीर्ष नेताओं राहुल गांधी और सोनिया गांधी के लिये क्रमशः अमेठी और रायबरेली सीटें छोड़ी जाएंगी। उल्लेखनीय है कि दिल्ली स्थित मायावती के आवास पर पिछले शुक्रवार को अखिलेश से साथ लगभग ढाई घंटे तक चली बैठक में दोनों दलों द्वारा 37-37 सीटों पर चुनाव लड़ने पर सहमति बन गई है। छह सीट कांग्रेस, रालोद और अन्य के लिये छोड़ी गई हैं।

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