कानपुर: दिवंगत पूर्व प्रधानमन्त्री अटल बिहारी बाजपेयी की जन्मस्थली बाह बटेश्वर को जिला बनाये जाने की मांग तेज हो गयी है। बाह बटेश्वर को अटल नगर नाम से जिला घोषित करने की मांग की जा रही है। एक सामाजिक संस्था के लोग बड़ी संख्या में साइकिल से लखनऊ से निकले हैं। रविवार को यह साइकिल यात्रा कानपुर पहुंची है। अब 21 अगस्त को यात्रा लखनऊ पहुंचेगी और अटल नगर जिले की मांग का ज्ञापन राज्यपाल और मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा।

बटेश्‍वर में जन्‍मे थे अटल

आगरा के बाह बटेश्वर जहां पर पूर्व प्रधानमन्त्री अटल बिहारी बाजपेयी का जन्म हुआ था। यह गाँव यमुना नदी के किनारे बसा हुआ है और विकास से कोसों दूर है। देश की आजादी के बाद से ही बाह बटेश्वर को जिला घोषित करने की मांग की जा रही है। इस दौरान उत्तर प्रदेश और केंद्र में कई सरकारें आईं और चली गयीं, लेकिन इस दिशा में कार्य नहीं किया जा सका।

सामाजिक संस्था दहेज़ निवारण एंव समाज कल्याण परिषद् ने अटल बिहारी बाजपेयी के निधन के बाद से इस मांग को पूरी ताकत से उठाया है। संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष हर नारायण यादव अपनी संस्‍था के पदाधिकारियों और आगरा के गणमान्यों के साथ साइकिल से अटल नगर की मांग को लेकर निकले हैं।

संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष हर नारायण यादव के मुताबिक बाह बटेश्वर गाँव अटल बिहारी बाजपेयी की जन्म और कर्मस्थली रही है। उनके निधन से पूरे देश में शोक की लहर है, लेकिन किसी का भी ध्यान उनकी जन्मस्थली की तरफ नहीं जा रहा है।  यमुना के किनारे का यह हिस्सा विकास से कोसों दूर है।  देश और प्रदेश की सरकार का यह दायित्व बनता है कि ऐसे महान पुरुष की जन्मस्थली का विकास कराएं।

यूपी के पहले सीएम ने उठाया था मुद्दा

हर नारायण यादव के मुताबि‍क वर्ष 1952 में प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पंडित गोविन्द वल्लभ पन्त ने बाह बटेश्वर की भगौलिक स्थिति और दस्यु प्रभावित इलाके को देखते हुए कहा था कि बाह को जिला बनाना चाहिए। सन 1976 में पंडित नारायण दत्त तिवारी ने आर्यन आयोग का गठन किया था। जिसमें बाह बटेश्वर, गाजियाबाद, ललितपुर, भदोही को जिला बनाने की संस्‍तुति की गई थी। जिसमें बाह बटेश्वर को छोड़ कर गाजियाबाद, ललितपुर और भदोही को जिला घोषित कर दिया गया था।

उन्होंने बताया कि आगरा मुख्यालयों से बाह के सैकड़ो गाँव 120 से 130 किलोमीटर की दूरी पर हैं। सरकारी अभिलेखों में बाह बटेश्वर दस्यु प्रभावित क्षेत्र है। 70 फीसदी भाग बीहड़ और ऊंचा- नीचा है। आर्यन आयोग की रिपोर्ट के बाद प्रदेश में 23 से अधिक जिलों का गठन हो चुका है।

उन्होंने कहा कि बटेश्वर में ही जैन धर्म का प्रमुख तीर्थ स्थल शौरीपुर है। चम्बल सेंचुरी में डालफिन घड़ियाल, मगरमच्छ को देखने के लिए लोग देश-विदेश से आते हैं। बाह बटेश्वर में पक्षी विहार भी है। वहीं चम्बल के किनारे पीनाहट का किला भी है। यह पर्यटन की दृष्टि से बहुत फेमस है। यहाँ पर पुराने ज़माने की  तोपें हैं।

बाह की स्थिति यह है कि सरकारी अधिकारी बाह बटेश्वर में रुकना भी पसंद नहीं करते हैं। पहले यहाँ पर एसपी रैंक का अधिकारी बैठता था। लेकिन बीते कई वर्षों से अधिकारी नहीं बैठता है।

हमारी मुख्यमंत्री से मांग  है कि पूर्व प्रधानमन्त्री अटल बिहारी बाजपेयी के नाम पर बाह बटेश्वर को जिला घोषित किया जाये। अटल नगर नाम से जिला बनाया जाए।