सुलतानपुर: बच्चे देश का भविष्य कहे जाते हैं। सरकार इन बच्चों की जिंदगियां बचाने के लिए तमाम तरह का जतन करती है। इन्हीं में एक नाम पल्स पोलियो अभियान का जुड़ा है। पर यहां जो मामला प्रकाश में आया है गर वो अमल पा गया होता तो सरकार जवाब देने लायक ही न बचती। दरअस्ल यहां पल्स पोलियो अभियान के तहत टीकाकरण के लिए आई 30 हजार डोज में प्रतिबंधित पीटू वायरस पाया गया है। पी-1 और पी-3 के साथ पी-2 मिलने पर स्वास्थ्य अफसरों में हड़कम्प मच गया, ख़बर मिलते ही अधिकारियों ने पूरी वायल की सप्लाई रोक दिया है।

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वायरस युक्त पी-2 के मिले 30 हजार वायल, मचा हड़कम्प
जानकारी के मुताबिक़ जिले में पल्स पोलियो अभियान के तहत डब्लूएचओ एवं भारतीय स्वास्थ्य के साथ परिवार कल्याण विभाग की तरफ से पी-1, पी-2 और पी-3 की तीन खुराक पूर्व में स्वीकृत कराया था। इसकी सप्लाई बायोमैट कंपनी ने पी-2 की थी। पूर्व में हुई जांच में पी-2 वायरस को घातक पाया गया था। इसमें पल्स पोलियो के जीवित वायरस मिलने पर केंद्र सरकार ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया था। बावजूद रोक के प्रतिबंधित वायरस पी-2 की 30 हजार डोज जिले में पहुंच गई और ऊपर बैठे जिम्मेदार आंखों पर पट्टी बांधे रहे। हैरत की बात ये कि जिले पर बैठे मातहत भी ऊपर के जिम्मेदारों के ही नक्शे कदम पर रहे। नतीजा ये हुआ कि बड़े पैमाने पर स्टाक ब्लॉक मुख्यालयों पर भेज दिया गया। जब जांच हुई तो इस राज से पर्दा उठा। ख़बर जब मुख्यालय पर पहुंची तो सबके पैरों तले जमीन खिसक गई। आनन-फानन में जो वायल ब्लॉकों में भेजी गई थी, उसे मंगाकर परिवार कल्याण एवं स्वास्थ्य विभाग कार्यालय में सुरक्षित करा दिया गया है।

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टीकाकरण में पुरानी वायल का ही होगा प्रयोग:CMO
इस बाबत सीएमओ डॉक्टर सीबीएन त्रिपाठी ने बताया कि जिले में रेगुलर इम्यूनाइजेशन कंपनी आपूर्ति करती रही है, बीच में बायोमैट की सप्लाई आ गई थी। इसमें प्रतिबंधित पी-2 वायरस शामिल पाया गया है, इसके बाद ब्लॉक मुख्यालयों से पूरी खेप मंगा ली गई है। अब इसे वापस कंपनी को भेजे जाने की तैयारी की जा रही है। उन्होंंने बताया कि अभियान से जुड़े सभी डाक्टर और स्वास्थ्य कर्मियों को इस वायल को लगाने पर रोक लगा दी गई है। सामान्य अभियान के दौरान पुरानी वायल को ही टीकाकरण में प्रयोग में लाने के लिए कहा गया है।