अमा वैलेंटाइन चचा, पहले से क्या 75 एनिवर्सरी कम थीं जो तुमने नया डे पैदा कर दिया

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आशीष शर्मा 'ऋषि'
आशीष शर्मा ‘ऋषि’

यार जिंदगी में पहले से ही इतने डे कम थे क्या। जो वैलेंटाइन चचा ने अपने नाम पर एक और हमारे सिर पर लाद दिया। वैसे ही फर्स्ट मीटिंग एनिवर्सरी, फर्स्ट डेट एनिवर्सरी, फर्स्ट किस एनिवर्सरी, फर्स्ट हग एनिवर्सरी, इंगेजमेंट एनिवर्सरी, मैरिज एनिवर्सरी और बर्थ डे के नाम पर हर दूसरे महीने या एक महीने में दो बार जेब पर डाका पड़ता है। अब ऐसे में ये वैलेंटाइन वीक हर साल नई भसड लेकर आ जाता है। वैसे भी हमारे देश में साल के नौ महीने शादियों का सीजन चलता रहता है।

आज सोकर उठे तो बेगम का मासूम चेहरा और ज्यादा मासूम और आखें और ज्यादा कजरारी नजर आ रही थीं। हाथ में चाय का कप लिए वो मुस्कान लिए जागने की मनुहार कर रही थीं। सब कुछ सपने सरीखा लग रहा था। तभी आवाज गूंजी चाय लीजिए ठंडी हो रही है। हम अचकचा गए और लपक के चाय का कप थाम लिया। बेगम बोलीं कैसी लग रही हूँ। बेसाख्ता निकल गया ! बड़ी जोर की लग रही हो.. कहीं जाना है क्या। जवाब मिला क्या मैं आपके साथ टाइम स्पेंड नहीं कर सकती। इसके बाद जली दिमाग की बत्ती। लेकिन पहले चाय के साथ इंसाफ करने की सोची।

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बेगम ने याद दिला दिया था कि कल वैलेंटाइन डे है। मुझे आउटिंग करनी है। ऑफिस के लिए निकले तो सोचा एटीएम देख लें। वो क्या है कि आजकल बैंक वाले मैसेज नहीं भेज रहे हैं। वहां से निकला तो हाथ में जो स्लिप थी उसमें लिखे 2 हजार मात्र मुहं चिढ़ा रहे थे। अभी 13 तारीख ही है और सामने फरवरी लंबी नजर आ रही थी। फिर याद आया कि अभी 4 दिन पहले ही फर्स्ट मीटिंग एनिवर्सरी जेब काट के विदा हुई है।

खैर ऑफिस पहुंचे काम में मन नहीं लग रहा था। पूरा समय वैलेंटाइन चचा को गरियाते रहे। यही दुआ कर रहे थे कि 14 फरवरी का दिन ही कैलेंडरों से मिट जाए। सीधे 15 आ जाए और हमें मुक्ति मिले। लेकिन ये हो नहीं सकता। इस लिए आपके साथ अपने दर्द को बांट रहे हैं। बुरा मत मानिएगा।

नोट : सारा का सारा फर्जिफिकेशन है। हमारे बहकावे में मत आइए। मजे से मनाइए वैलेंटाइन। क्योंकि हम जैसे मिडिल क्लास मैंगो मैन के लिए कम ही मौके आते हैं। जब मियां बीवी कुछ क्वालिटी टाइम स्पेंड करते हैं। बाकी समय तो दाल रोटी के जुगाड़ में चला जाता है।

 

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