रियालिटी चेक : नहीं बदली सरकारी अस्पतालों की सूरत, जानिए कौन FAIL और कौन PASS

लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सूबे के डॉक्टरों को संवेदनशील, काम के प्रति ईमानदार होने की सीख दी है। डॉक्टरों को सुबह आठ बजे ओपीडी में बैठने की हिदायत दी गयी है। क्या है इस हिदायत का असर, ‘अपना भारत’ की टीमों ने प्रदेश भर में अस्पतालों का रियलिटी चेक किया।
1. लखनऊ : सप्लीमेंट्री से पास हुआ डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अस्पताल
आठ अप्रैल को ‘अपना भारत’ की टीम सीएम आवास से महज 100 मीटर दूरी पर स्थित डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी अस्पताल सुबह पौने आठ बजे पहुंची। अस्पताल में कर्मचारियों की हाजिरी दर्ज करने के लिए दो बायोमेट्रिक मशीनें लगी हैं। आठ बजते ही कर्मचारियों और डॉक्टरों का आना शुरू हुआ और सब अपनी बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज करते हैं। अब तक ओपीडी में डॉक्टरों के कमरों के बाहर मरीजों की लंबी कतार लग चुकी थी। सब डॉक्टरों के इंतजार में खड़े थे। कई डॉक्टरों ने तो समय से अपनी कुर्सी संभाल भी ली पर हड्डी रोग विशेषज्ञ, एमडी फिजीशियन समेत करीब पांच डाक्टरों के कमरे खाली पड़े थे। पूछने पर अटेंडेंट ने मुस्कुराते हुए बताया कि डॉक्टर साहब राउंड पर हैं, लेकिन सूत्रों ने बताया कि डॉक्टर साहब थोड़ा देर से आते हैं।
महिला चिकित्सक ने फोटो खींचने पर किया सवाल
हमारे छायाकार डॉक्टरों की खाली कुर्सियों की तस्वीरें अपने कैमरे में कैद कर रहे थे तो एक महिला चिकित्सक ने उलïटे सवाल दाग दिया कि अगर कोई 15 मिनट या आधा घंटा लेट हो जाए तो क्या फोटो खींचना उचित होगा?  चिकित्सा अधीक्षक डॉ.आशुतोष दुबे का कहना था कि कई डॉक्टर राउंड पर गए हैं। ज्यादातर डॉक्टर समय पर ही आते हैं।
2. गोरखपुर फेल: सीएम के शहर के डॉक्टरों को मरीजों की परवाह नहीं
11 अप्रैल को मेडिकल कॉलेज में सुबह 8 से 8.25 बजे तक पर्ची काउंटर पर लंबी लाइन लगी थी। मरीजों ने बताया कि सुबह छह बजे से यहां लाइन लग जाती है। ओपीडी में जगह-जगह गंदगी बिखरी दिखी। डॉक्टरों के कमरों के बाहर आवारा पशु घूमते दिखते हैं। डॉक्टर तो दूर, यहां सफाई कर्मी भी अभी तक नहीं पहुंचे थे। मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ.महीम मित्तल के कमरे पर ताला लटका नजर आया। टीबी और चेस्ट विभाग के प्रवक्ता डॉ.अश्विनी कुमार मिश्रा के कमरे पर भी ताला लटका था और बाहर मरीजों की लाइन लगी थी। सबसे ज्यादा भीड़ न्यूरो विभाग की ओपीडी में दिखी। यहां ८.२५ बजे तक मेन गेट ही नहीं खुला था।
जिला और महिला अस्पताल – 8.35 से 8.55 बजे तक : महिला अस्पताल में हलचल काफी अधिक दिखी। अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर लंबी कतार लगी थी। 8.35 बजे तक कोई डाक्टर नहीं पहुंचीं थीं। प्रभारी चिकित्साधिकारी के कमरे के बाहर भी महिलाओं की लंबी लाइन लगी थी। अंदर दो नर्स डॉक्टर साहिबा के इंतजार में बैठी थीं। पूछने पर बताया कि मैडम 8 बजे आ जाती हैं,आती ही होगीं। लेकिन सुबह 8.40 बजे तक जिला अस्पताल की ओपीडी देखकर लगा कि डॉक्टरों को अपने मुख्यमंत्री के आदेश की फिक्र नहीं है।
3. आगरा पास : मरीजों के इंतजार में दिखे डॉक्टर
जिला अस्पताल में सुबह आठ बजे डॉक्टर अपने कमरों में बैठे नजर आए। अस्पताल के प्रभारी अतुल कुमार ने बताया कि सभी डॉक्टरों की अटेंडेंस सुबह ८ बजकर ५ मिनट पर लखनऊ मेल कर दी जाती है। इसके बाद आने वाले को अनुपस्थित ही माना जाता है। सीएमओ बी.एस.यादव ने भी अपने-अपने क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्र प्रभारियों को आठ बजे तक अस्पताल आने वाले डाक्टरों का ब्योरा देने को कहा है। यह व्यवस्था तब तक प्रभावी रहेगी, जब तक सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर बायोमेट्रिक हाजिरी शुरू नहीं कर दी जाती। दूसरी ओर एस.एन.मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों की दबंगई और मनमानी के कारण मीडिया का प्रवेश अब भी वॢजत है। यहां कई बार कैमरे तोडऩे और मारपीट की घटनाएं हो चुकी हैं।
4. बहराइच पास : दिखा योगी के फरमान का खौफ, समय से आ गए डाक्टर 
अपना भारत की टीम सुबह 8:30 पर जिला अस्पताल के इमरजेंसी कक्ष में पहुंची। यहां डॉ. आर.के. वर्मा व दो फार्मेसिस्ट मौजूद थे। डॉक्टर मरीज को देख रहे थे। पूछने पर मरीज के तीमारदार बोले, ‘भइया सरकार बदल गई तो इलाज शुरू होए गवा। नाए तो डाक्टर साहब नौ-दस बजे से पहले नाए आवत रहे।’
5. मेरठ फेल : स्वास्थ्य केन्द्र और मेडिकल कालेज पुराने ढर्रे पर
आठ अप्रैल को सुबह नौ बजे मेरठ के सलावा, किठौर और कायस्थ बढ्ढा स्वास्थ्य केंद्रों में ताला लटका मिला। डॉक्टर और स्टाफ नदारद था। दूसरी ओर पीएल शर्मा अस्पताल की ओपीडी में डॉक्टर मरीजों का उपचार करते दिखे। वहीं मेडिकल कॉलेज अस्पताल का हाल बुरा था। मरीजों की भीड़ लगी थी, लेकिन डॉक्टर लापता थे। इसका कारण बताने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी भी नहीं था। वैसे कर्मचारियों का रटारटाया जवाब था कि डॉक्टर साहब आने वाले हैं।
6. रायबरेली फेल : सरकार की सख्ती बेअसर
रायबरेली के महिला और पुरुष अस्पताल में आठ अप्रैल को सुबह आठ बजे मरीजों के पंजीकरण का काउंटर बंद पड़ा था। मरीजों की लम्बी लाइन लगी थी और ओपीडी के कमरों में ताले लटके थे। लगभग साढ़े आठ बजे कमरों के ताले खुले, लेकिन 9 बजे तक जिला अस्पताल के अधिकंाश डॉक्टर नदारद थे। महिला अस्पताल में भी यही हाल था।
7. आजमगढ़ फेल : डॉक्टरों ने न सुधरने की खा रखी है कसम
आठ अप्रैल सुबह ९: २० बजे चक्रपानपुर स्थित सुपर फैसेलिटी अस्पताल में गेट पर ही गंदगी का अंबार नजर आता है। अस्पताल के अधीक्षक डॉ.डी.चन्द्रा तो मौजूद थे मगर प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार 10 बजकर 13 मिनट पर पहुंचे। ओपीडी में मरीजों की भीड़ थी, लेकिन डॉ. अमित पटेल, डॉ.प्रशान्त व डॉ.पवन विश्वकर्मा सवा दस से साढ़े दस बजे के बीच पहुंचे।
१० अप्रैल ९:०५ मिनट : शहर स्थित राहुल सांकृत्यायन जिला महिला चिकित्सालय की ओपीडी में डॉ. यू.बी. चौहान, डॉ. असलम, डॉ. रश्मि सिन्हा और डॉ. शिप्रा सिंह नदारद थीं। कई के कमरे तक नहीं खुले थे। कर्मचारियों ने बताया कि यह सभी चिकित्सक जहां निजी प्रैक्टिस करते हैं, वहीं पर होंगे।
8. फतेहपुर फेल : मरीज इंतजार में, डॉक्टर बेफिक्र
सात अप्रैल सुबह ८:१५ बजे-जिला अस्पताल फतेहपुर में मरीज इंतजार में बैठे थे, लेकिन बाल रोग विशेषज्ञ का कमरा खाली पड़ा था। 8:30 बजे तक दो डॉक्टर ही अपने कमरों में मौजूद थे। बाकी सभी कमरे या बंद थे या खाली पड़े थे। जिला अस्पताल में 25 डॉक्टरों की तैनाती है, लेकिन रियलिटी चेक में महज दो डॉक्टरों के अलावा बाकी सभी नदारद थे।
(रिपोर्ट – लखनऊ से सुधांशु सक्सेना, आशुतोष त्रिपाठी, अनुराग शुक्ला। गोरखपुर – पूर्णिमा श्रीवास्तव, आगरा – मानवेन्द्र मल्होत्रा, बहराइच – राहुल यादव, मेरठ – सुशील कुमार, रायबरेली – नरेंद्र कुमार, आजमगढ़ – संदीप अस्थाना, फतेहपुर – चंद्रभान सिंह त्यागी)

Loading...
loading...


Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे! हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App