यहां प्रसव से 15 दिन पहले घर छोड़ने को मजबूर हैं गर्भवती महिलाएं, ये है वजह

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इंदौर: केंद्र सरकार शिशु और मातृ-मृत्यु दर में कमी लाने के लिए जननी सुरक्षा और मातृ वंदना योजना जैसी कई अन्य कल्याणकारी योजनायें चला रही है। इन योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए हर साल लाखों –करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाया जा रहा है।

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सरकार की कोशिश है कि कैकेंद्र सरकार शिशु और मातृ-मृत्यु दर में कमी लाने के लिए जननी सुरक्षा और मातृ वंदना योजना जैसी कई अन्य कल्याणकारी योजनायें चला रही है। इन योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए हर साल लाखों –करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाया जा रहा है। जैसे भी करके मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जाये लेकिन उसकी मंशा पर कभी अफसरशाही तो कभी मौसम पानी फेर देता है।

Newstrack.com आज आपको मध्य प्रदेश के एक गांव के बारे में बताने जा रहा है। जहां पर हर साल गर्भवती महिलायें प्रसव से 10 दिन पहले ही अपना घर छोड़ने को मजबूर हो जाती है।

ये है पूरा मामला

मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले की बड़ौदा तहसील के सिरसौद गांव में करीब 720 परिवार रहते है।  गांव के ज्यादातर लोगों के लिए खेती ही रोजगार का सहारा है। लेकिन बारिश में हर साल उनकी फसल का भारी नुकसान हो जाता है। इसलिए गांव के अधिकांश लोग अब रोजगार की तलाश में लिए शहरों की तरफ पलायन करने लगे है।

वहीं महिलाएं घर पर रहकर परिवार को संभालने का काम करती है। पति कमाकर पैसे भेजते है उसी से पूरे परिवार का खर्चा चलता है। यहां कई महिलाएं ऐसी भी है जो छोटा मोटा -काम करके परिवार का पेट पालती है।

इस गांव के लोगों के लिए बारिश हर साल मुसीबत लेकर आती है। जिन घरों में गर्भवती महिलाएं होती है। उन घरों के पुरुष बारिश में शहर से काम छोड़कर अपने परिवार की चिंता में अपने गांव वापस लौट आते है।

ये है गांव छोड़ने की वजह

सिरसौद गांव के एक हिस्से को जोड़ने वाली सड़क बारिश के कारण हर साल चार से पांच महीने तक पूरी तरह से जलमग्न रहती है। सड़क पर चार से पांच फीट तक पानी भर जाता है। गांव में बाढ़ जैसे हालात होने के कारण लोगों को अपने जान माल की चिंता पहले ही सताने लगती है।

ऐसे में अगर किसी घर में कोई बीमार पड़ जाता है तो समय पर उसे हॉस्पिटल ले जाना संभव नहीं हो पाता है। कई बार मरीज की मौत तक हो जाती है। यहीं वजह है कि गांव के अधिकांश लोग बारिश शुरू होने से 10 से 15 दिन पहले ही अपना घर छोड़ने लगते है।

प्रसव से दस दिन पहले ही भर्ती हो जाती है महिलाएं

जिन घरों में गर्भवती महिलाएं है और उनका प्रसव होने वाला है। ऐसी महिलाओं को प्रसव से दस दिन पहले ही नजदीक के हास्पिटल में एडमिट करा दिया जाता है। ताकि प्रसव के समय कोई परेशानी न आये। कई बार देखने को मिलता है कि प्रसव के दिन घरवाले गर्भवती महिला को हॉस्पिटल ले जाने की कोशिश करते है लेकिन सड़कें ठीक न होने या बारिश में आवागमन बाधित होने से वे टाइम पर नहीं पहुंच पाती है। कई बार रास्ते में ही उनकी मौत हो जाती है। ऐसे में सिरसौद गांव के लोग कोई रिस्क नहीं लेना चाहते है। वे प्रसव से कुछ दिन पहले ही गर्भवती महिला को हॉस्पिटल में एडमिट करा देते है।

720 में से 250 परिवार संकट में

बताया जाता है कि सिरसौद गांव में 720 परिवारों की आबादी है, लेकिन गांव के बीच से बह रही रातड़ी नदी के कारण एक हिस्से में बसे 250 परिवारों का संपर्क बारिश के कारण पूरे गांव से कट जाता है। नदी पर एक स्टॉप डैम बना है। यह भरते ही गांव का रास्ता चार से पांच फीट तक पानी में डूब जाता है। स्टॉप डैम में पानी कम से कम दिसंबर तक भरा रहता है।

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