इलाहाबाद:  हाईकोर्ट ने प्रयाग संगम क्षेत्र में पालीथीन कचरे को लेकर दाखिल जनहित याचिका  पर इलाहबाद के जिलाधिकारी ,नगर आयुक्त ,ए डी ए और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से 15 जून तक विस्तृत जानकारी मांगी है। कोर्ट ने गुरूवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए पूछा है कि शहर में कूड़ा उठाने और उसके निस्तारण के प्रबंधन की क्या व्यवस्था की गयी है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से किया सवाल

कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से सवाल किया कि उसने अब तक क्या कार्यवाही की है।इसके साथ ही साथ यह भी पूछा कि बोर्ड बताए कि पालीथीन की रोक के बावजूद बिक्री के लिए कौन जिम्मेदार है।

यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति अजित कुमार की खंण्डपीठ ने विधि छात्रों कार्तिकेय अग्रवाल व अन्य की जनहित याचिका पर दिया है।अधिवक्ता रितेश श्रीवास्तव ने कोर्ट को  बताया कि राज्य सरकार ने 40 माइक्रॉन से कम की पालीथीन की खरीद और विक्री पर रोक लगा रखी है।उन्होंने इस सम्बन्ध में हाई कोर्ट के पूर्व में पारित आदेश की जानकारी भी दी। उन्‍होंने कहा कि जिला प्रशासन पालीथीन बैन के आदेश को लागू नहीं कर पा रहा है। याचियों ने कोर्ट को बताया कि संगम एरिया पालीथीन कचरे से पटा है। कूड़ा उठाने वाले नदी में ही उसे फेंक रहे हैं। प्रशासन सफाई की ठीक व्यवस्था नही कर रहा हैं, इसी अग्रिम सुनवाई 15 जून को भी होगी।तब तक बोर्ड एक रिपोर्ट तैयार करके पेश करे।