मेलबर्न: वायु प्रदूषण सेहत के लिए कितना खतरनाक है इसका आमतौर पर लोगों को अंदाजा भी नहीं है। खराब से खराब बीमारी की वजह वायु प्रदूषण बन रहा है। इस कड़ी में अब ‘ऑटिज़्म’ का नाम भी जुड़ गया है। एक नए शोध से पता चला है कि जो बच्चे जहरीली हवा में सांस लेते हैं उनमें ऑटिज्म होने का खतरा बहुत ज्यादा होता है।

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चीन में तीन वर्ष तक के बच्चों में किए गए शोध में पता चला है कि जो बच्चे बाहर की हवा में पार्टिकुलेट मैटर के प्रति एक्सपोज़्ड रहे उनमें बाकी बच्चों की तुलना में ऑटिज़्म होने का खतरा 78 फीसदी ज्यादा था। वाहनों के धुंए, धूल, कारखानों के धुंए और निर्माण कार्य से पैदा प्रदूषण की हवा में ये बच्चे सांस ले रहे थे। ये शोध शांघाई में नौ साल तक 1444 बच्चों पर किया गया। शोध टीम के अगुवा प्रोफेसर यूमिंग गुओ के अनुसार शिशुओं के मस्तिष्क पर विषाक्तता का असर पडऩे का ज्यादा खतरा होता है।मस्तिष्क की कार्यप्रणाली और इम्यून सिस्टम स्थाई रूप से बिगड़ सकते हैं।

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शोध से पता चला है कि पीएम1 यानी हवा में मौजूद सबसे छोटे कण शिशुओं में ऑटिज़्म होने की लिए जिम्मेदार होते हैं। प्रोफेसर गुओ के अनुसार वायु प्रदूषण से समय पूर्व प्रसव, शिशुओं में सीखने की क्षमता की कमी और गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं। प्रोफेसर गुओ कहते हैं कि वायु प्रदूषण का कोई भी सेफ लेवल नहीं होता है।

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