क्या सवर्णों को मिलेगा हारिजेंटल रिजर्वेशन?

अनुसूचित जातियों अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों को दिये जाने वाले आरक्षण को वर्टिकल आरक्षण कहते हैं। इन तीन श्रेणियों को दिया जाने वाला आरक्षण किसी भी हालत में कभी भी 50 फीसद से ज्यादा नहीं होना चाहिए।

लोस चुनाव के पहले मोदी की गहरी चाल गरीब सवर्णों के लिए आरक्षण

रामकृष्ण वाजपेयी

निसंदेह लोकसभा चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी सरकार ने सवर्णों को आरक्षण के रूप में एक बड़ा दांव चल दिया है। केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में लिए गए फैसले के अनुसार अब आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण जातियों को 10 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा। गौरतलब है कि 2018 में एससी एसटी एक्ट को लेकर जिस तरह सरकार ने मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलट दिया था। इसके बाद सवर्ण समाज खासा नाराज था।

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सवाल यह है कि सरकार सवर्णों को आरक्षण देगी कैसे। क्या ये व्यवस्था आरक्षण के निर्धारित कोटे के अंदर होगी या फिर कोटे के इतर जो 50 प्रतिशत है उसी में हंसिया चलेगा। माना जा रहा है कि मंगलवार को मोदी सरकार संविधान संशोधन बिल संसद में पेश कर सकती है। ऐसे में आरक्षण का कोटा 49 प्रतिशत से 59 प्रतिशत हो जाएगा। बता दें कि मंगलवार को ही संसद के शीतकालीन सत्र का आखिरी दिन है। लेकिन यह होगा कैसे। संविधान के जानकार वरिष्ठ अधिवक्ताओं का कहना है कि आरक्षण नीति में दो तरह के आरक्षण की व्यवस्था है। पहला वर्टिकल आरक्षण दूसरा हारिजेंटल आरक्षण।

क्या है वर्टिकल आरक्षण

अनुसूचित जातियों अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों को दिये जाने वाले आरक्षण को वर्टिकल आरक्षण कहते हैं। इन तीन श्रेणियों को दिया जाने वाला आरक्षण किसी भी हालत में कभी भी 50 फीसद से ज्यादा नहीं होना चाहिए।

क्या है हारिजेंटल आरक्षण

पूर्व सैनिकों, दिव्यांग व्यकितयों, खिलाड़ियों, अल्पसंख्यकों आदि को दिये जाने वाले आरक्षण को हारिजेंटल आरक्षण कहते हैं। यह आरक्षण वर्टिकल आरक्षण के इतर लागू होता है। जिसे इंटरलाकिंग आरक्षण भी कहा जाता है। हारिजेंटल श्रेणी में दिये गये आरक्षण का प्रतिशत भी एससी, एसटी और ओबीसी को दिये जाने वाले वर्टिकल आरक्षण के प्रतिशत की तरह विभाजित किया जाता है। यहां तक कि हारिजेंटल आरक्षण दिये जाने के बावजूद अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ों को दिये गए आरक्षण का प्रतिशत समान रहता है। यह किसी भी हालत इन श्रेणियों के लिए निर्धारित सीमा से अधिक नहीं हो सकता है।

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राजेश कुमार दरिया बनाम राजस्थान लोक सेवा आयोग और अन्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने निम्नलिखित शर्तों में कानून की व्याख्या की थी| यह जांचने से पहले कि क्या महिलाओं से संबंधित आरक्षण प्रावधान को सही ढंग से लागू किया गया था, हारिजेंटल आरक्षण की प्रकृति और इसके आवेदन के तरीके का उल्लेख करना लाभप्रद होगा। इंद्र सवन्नी बनाम भारत संघ में क्षैतिज आरक्षण के सिद्धांत को इस प्रकार समझाया गया

सभी आरक्षण समान प्रकृति के नहीं हैं। दो प्रकार के आरक्षण हैं, जो सुविधा के लिए, वर्टिकल आरक्षण और हारिजेंटल आरक्षण के रूप में संदर्भित किए जा सकते हैं। अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों [(अनुच्छेद 16 (4) के तहत)] के पक्ष में आरक्षण को वर्टिकल आरक्षण कहा जा सकता है जबकि शारीरिक रूप से विकलांगों (अनुच्छेद 16 के खंड (1) के तहत) के रूप में संदर्भित किया जा सकता है हारिजेंटल आरक्षण। हारिजेंटल आरक्षण वर्टिकल आरक्षण में कटौती – इंटरलॉकिंग आरक्षण क्या कहलाता है।

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अधिक सटीक होने के लिए, मान लीजिए कि रिक्तियों का 3% भौतिक रूप से विकलांग व्यक्तियों के पक्ष में आरक्षित है; यह अनुच्छेद के खंड (1) से संबंधित होगा। कोटा के खिलाफ चुने गए व्यक्तियों को आवश्यक समायोजन करके उस कोटा में रखा जाएगा, इसी प्रकार, यदि वह खुली प्रतियोगिता श्रेणी से संबंधित है, तो उसे आवश्यक समायोजन करके उस श्रेणी में रखा जाएगा। इन क्षैतिजों के लिए प्रदान करने के बाद भी नागरिकों के पिछड़े वर्ग के पक्ष में आरक्षण का जो प्रतिशत बना हुआ है वही बना रहना चाहिए। ”

वरिष्ठ अधिवक्ताओं का कहना है कि इस बारे में स्पष्ट बात तो तभी कही जा सकेगी जब सरकार क्या करने जा रही है यह स्पष्ट हो। वैसे वर्टिकल रिजर्वेशन में छेड़छाड़ संभव नहीं है। उसको बढ़ाया नहीं जा सकता है। ऐसे में हारिजेंटल रिजर्वेशन ही संभव लग रहा है।