विश्व विरासत दिवस: राष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान होती हैं एतिहासिक धरोहरें

पूनम नेगी

लखनऊ: पिछले दिनों गांधीजी के स्मृति चिह्नों को वापस लाने की बहस के बीच यह सवाल भी उठा था कि क्या वाकई हम भारतीय अपनी विरासत के संरक्षण को लेकर गंभीर हैं! नोबेल साहित्य विजेता गुरुदेव रविन्द्रनाथ टैगोर के पदकों का चोरी हो जाना, आये दिन प्राचीन मूर्तियों की चोरी या तोड़-फोड़ की घटनाएं और ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों की स्वच्छता के प्रति हमारा उदासीन व लापरवाह रवैया सभ्य समाज के चेहरे पर प्रश्न चिह्न लगाता है। किसी भी राष्ट्र की ऐतिहासिक धरोहरें उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की परिचायक तो होती ही हैं, बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटकों को आकृष्ट कर परोक्ष रूप से राष्ट्रीय आय का भी महत्वपूर्ण स्रोत होती हैं। अतएव इनकी सुरक्षा व संरक्षण का जिम्मा शासन-प्रशासन के साथ देश के प्रत्येक नागरिक का होना चाहिए।

इन विरासतों को संरक्षित करने के प्रति जनमानस में जागरूकता फैलाने के मद्देनजर 18 अप्रैल को पूरे विश्व में विश्व धरोहर दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य यह है कि पूरे विश्व में मानव सभ्यता से जुड़े ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण के प्रति चेतना जगायी जा सके। धरोहर अर्थात मानवता के लिए अत्यंत महत्व की जगह, जो आगे आने वाली पीढ़ियों के लिए बचाकर रखी जाती हैं, उन्हें विश्व धरोहर के रूप में जाना जाता है। ऐसे महत्वपूर्ण स्थलों के संरक्षण की पहल संयुक्त राष्ट्र के अंतर्राष्ट्रीय संगठन यूनेस्को ने  सन 1968 ई. की थी। इसके तहत सर्वप्रथम विश्व प्रसिद्ध इमारतों और प्राकृतिक स्थलों की रक्षा के लिए एक साझा विचार बनाया गया। फिर 1972 ई. में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान इस प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र के सामने प्रस्ताव पारित किया गया। इस दौरान विश्व के लगभग सभी देशों ने मिलकर ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहरों को बचाने की शपथ ली। इस तरह ‘यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सेंटर’ का अस्तित्व प्रकाश में आया। इसके बाद 18 अप्रैल, 1978 ई. में सर्वप्रथम विश्व के कुल 12 स्थलों को विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया। इस दिन को तब ‘विश्व स्मारक और पुरातत्व स्थल दिवस’  के रूप में मनाया गया। था। लेकिन यूनेस्को ने वर्ष 1983 ई . से इस दिवस को “विश्व विरासत दिवस” के रूप में मनाया जाने लगा।

फिर 1972 में लागू एक अंतर्राष्ट्रीय संधि के तहत विश्व भर के धरोहर स्थलों को मुख्यतः तीन श्रेणियों में शामिल विभक्त किया गया। पहला प्राकृतिक धरोहर स्थल, दूसरा सांस्कृतिक धरोहर स्थल और तीसरा मिश्रित धरोहर स्थल।

प्राकृतिक धरोहर स्थलऐसी धरोहर भौतिक या भौगोलिक प्राकृतिक निर्माण का परिणाम या भौतिक और भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत सुंदर या वैज्ञानिक महत्व की जगह या भौतिक और भौगोलिक महत्व वाली यह जगह किसी विलुप्ति के कगार पर खड़े जीव या वनस्पति का प्राकृतिक आवास हो सकती है।

सांस्कृतिक धरोहर स्थलइस श्रेणी की धरोहर में स्मारक, स्थापत्य की इमारतें, मूर्तिकारी, चित्रकारी, स्थापत्य की झलक वाले, शिलालेख, गुफा आवास और वैश्विक महत्व वाले स्थान; इमारतों का समूह, अकेली इमारतें या आपस में संबद्ध इमारतों का समूह; स्थापत्य में किया मानव का काम या प्रकृति और मानव के संयुक्त प्रयास का प्रतिफल, जो कि ऐतिहासिक, सौंदर्य, जातीय, मानवविज्ञान या वैश्विक दृष्टि से महत्व की हो, शामिल की जाती हैं।

मिश्रित धरोहर स्थल इस श्रेणी के अंतर्गत वह धरोहर स्थल आते हैं जो  प्राकृतिक और सांस्कृतिक दोनों ही रूपों में महत्वपूर्ण होते हैं।

विश्व की सात प्रमुख धरोहर
चीन की दीवार: चीन की विशाल दीवार मिट्टी और पत्थर से बनी एक किलेनुमा दीवार है, जिसको चीन के कई शासकों द्वारा उत्तर के हमलों से रक्षा के लिए 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व से 16वीं शताब्दी में बनवाया गया था।  6400 किलोमीटर लम्बी यह मानव निर्मित दीवार अंतरिक्ष से भी देखी जा सकती है।

गीजा का पिरामिड: मिस्र के पिरामिड वहां के राजाओं के लिए बनाए गये ऐसे स्मारक हैं जिनमें राजाओं के शवों को दफनाकर सुरक्षित रखा जाता था। इन शवों को ममी कहते हैं।  मिस्र में 138 पिरामिड हैं। इनमें काहिरा के उपनगर गीजा  का “ग्रेट पिरामिड” 450 फुट ऊंचा तथा 13 एकड़ की परिधि में बना है।

ताजमहल: भारत के आगरा शहर में स्थित ताजमहल का निर्माण मुगल सम्राट शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज की याद में (सन 1632 से 1653 तक) के मध्य करवाया था। सफेद संगमरमर से बनी इस बेहद खूबसूरत इमारत को मुगल स्थापत्य कला का नायाब नमूना माना जाता है। सन् 1983 में ताजमहल को विश्व धरोहर सूची में जगह मिली थी।

स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी:  स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी न्यूयॉर्क हार्बर में स्थित एक तांबे की मूर्ति है। चौकी व आधारशिला मिला कर यह मूर्ति 305 फुट ऊंची है। 22 मंजिलों तक पहुंचने के  लिए इसमें 354 सीढियां चढ़नी पड़ती हैं। अमेरिकन क्रांति के दौरान फ्रांस और अमेरिका की दोस्ती के प्रतीक के तौर पर ये मूर्ति फ्रांस ने 1886 में अमेरिका को दी थी।

कोलोजियम:  इस भव्य रोमन एम्फीथिएटर का निर्माण ईसा पूर्व 80 में किया गया था। कोलोजियम सम्राट वेस्पेसियन ने इसका निर्माण खजाना रखने के लिए करवाया था। बाद में उसके बेटे टाइटस ने इसे पूरा करवाया था। इसमें 50 हजार लोग बैठ सकते थे। ग्लेडियटर यहां युद्ध कला का प्रदर्शन किया करते थे।

ईस्टर आइलैंड:  ईस्टर आइलैंड डरावने स्थल के रूप में मशहूर है। प्रशांत महाद्वीप में सुदूर स्थित ईस्टर द्वीप पर प्राचीनतम विशाल शिलाओं के मानव सिरों वाली प्रतिमाएं आश्चर्य से भरपूर हैं। स्थानीय भाषा में “रापा नुई” कहलाने वाले इस द्वीप पर एक ही पत्थर से तराशी हुई मूर्तियां जगह-जगह बिखरी हुई हैं। सबसे बड़ी मूर्ति 33 फीट ऊंची व 75 टन भारी है।

ऑपेरा हाउस:  ऑपेरा हाउस ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर की शान है। 1940 में यूगिन गूसेन ने संगीत और ऑपेरा कार्यक्रमों के लिए नए स्थान का निर्माण करवाने के लिए इस स्थान को बनवाने की बात की थी। इसके डिजाइन के लिए प्रतियोगिता रखी गयी थी।

विश्व धरोहरों में भारत का महत्वपूर्ण स्थान
उपरोक्त सात विश्व धरोहरों के अलावा विश्व धरोहरों के मामले में भारत का दुनिया में महत्वपूर्ण स्थान है और यहां के ढाई दर्जन से अधिक ऐतिहासिक स्थल, स्मारक और प्राचीन इमारतें यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं। हर साल 18 अप्रैल को मनाया जाने वाला विश्व धरोहर दिवस 26 साल से निरंतर विश्व की अद्भुत, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के महत्व को दर्शाता रहा है। भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों का जिक्र करें तो ऐसे बहुत से स्थानों का नाम जहन में आता है जिन्हें विश्व धरोहर सूची में महत्वपूर्ण स्थान हासिल है। लेकिन मोहब्ब्त के प्रतीक ताजमहल और मुगलकालीन शिल्प की दास्तां बयान करने वाले दिल्ली के लालकिले ने इस सूची को भारत की ओर से और भी खूबसूरत बना दिया है। ताजमहल को पिछले साल कराए गए एक विश्वव्यापी मतसंग्रह के दौरान दुनिया के सात अजूबों में अव्वल नंबर कर रखा गया था। विश्व धरोहर सूची में शामिल भारत की अजंता की गुफाएं 200 साल पूर्व की कहानी कहती नजर आती हैं लेकिन इतिहास के पन्नों में धीरे-धीरे ये भुला दी गईं और बाद में बाघों का शिकार करने वाली एक ब्रिटिश टीम ने इनकी फिर खोज की। विश्व धरोहर सूची में शामिल एलोरा की गुफाएं दुनिया भर को भारत की हिन्दू, बौध्द और जैन संस्कृति की कहानी बताती हैं। ये गुफाएं लोगों को 600 और 1000 ईस्वीं के बीच के इतिहास से रूब डिग्री कराती हैं। भारत को विश्व धरोहर सूची में 14 नवंबर 1977 में स्थान मिला। तब से अब तक अनेक भारतीय स्थलों को विश्व धरोहर स्थल के रूप में घोषित किया जा चुका है। इनमें प्रमुख हैं- आगरे का किला (उत्तर प्रदेश), अजंता, एलोरा व एलीफैन्टा की गुफाएं (महाराष्ट्र), सांची के बौद्ध स्तूप ( मध्य प्रदेश),चंपानेर-पावागढ का पुरातत्व पार्क (गुजरात), छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (महाराष्ट्र), गोवा के चर्च, फतेहपुर सीकरी,  चोल मंदिर (तमिलनाडु), हम्पी के स्मारक (कर्नाटक), महाबलीपुरम के स्मारक (तमिलनाडु), पट्टाडक्कल के  स्मारक(कर्नाटक), हुमायूं का मकबरा( दिल्ली), काजीरंगा राष्ट्रीय अभ्यारण्य (असम), केवलदेव राष्ट्रीय अभ्यारण्य (राजस्थान), खजुराहो के मंदिर एवं स्मारक (मध्य प्रदेश),महाबोधी मंदिर(बोधगया, बिहार), मानस राष्ट्रीय अभ्यारण्य(असम), भारतीय पर्वतीय रेल (पश्चिम बंगाल), नंदादेवी राष्ट्रीय अभ्यारण्य एवं फूलों की घाटी (उत्तरांचल), कुतुब मीनार(दिल्ली), भीमबटेका (मध्य प्रदेश), लाल किला (दिल्ली), कोणार्क मंदिर (उड़ीसा), सुंदरवन राष्ट्रीय अभ्यारण्य (पश्चिम बंगाल), चित्तौड़गढ़ व गागरोन का किला (राजस्थान),  रानी का वाव  गुजरात), ग्रेट हिमालय राष्ट्रीय उद्यान (हिमाचल प्रदेश )।

 


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