‘भगवा आतंकवाद’ पर पुनिया और शिवराज पाटील ने पेश की सफाई

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नई दिल्ली : कांग्रेस ने सोमवार को कहा कि न तो पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी और न ही किसी पदाधिकारी ने कभी भी ‘भगवा आतंकवाद’ शब्द का प्रयोग किया है और इस संबंध में विरोधियों द्वारा लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं। कांग्रेस प्रवक्ता पी.एल. पुनिया ने कहा, “मुझे ऐसा कोई भी वीडियो और ऑडियो क्लिप दिखा दीजिए, जिसमें कोई भी कांग्रेस पदाधिकारी भगवा आतंकवाद शब्द का प्रयोग करता हुआ दिखाई दे रहा हो। भगवा आतंकवाद जैसी कोई चीज है ही नहीं।”

उन्होंने कहा, “हमारा मानना है कि आतंकवाद किसी धर्म और समुदाय के साथ जुड़ा नहीं है।”

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हैदराबाद में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की अदालत ने मक्का मस्जिद बम विस्फोट मामले में पांचों आरोपियों को बरी कर दिया था, जिसके बाद कांग्रेस की प्रतिक्रिया सामने आई है। 2007 में जुमे की नमाज के दौरान विस्फोट हुआ था, जिसमें नौ लोगों की मौत हो गई थी और 50 अन्य घायल हो गए थे।

एनआईए द्वारा आरोपी बनाए गए हिंदू दक्षिणपंथी समूह अभिनव भारत के सभी सदस्य नबकुमार सरकार उर्फ स्वामी असीमानंद, देवेंद्र गुप्ता, लोकेश शर्मा, भरत मोहनलाल रातेश्वर उर्फ भरत भाई और राजेंद्र चौधरी को अदालत ने बरी कर दिया।

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पुनिया ने हालांकि कहा कि यह सवाल बरकरार रहेगा कि कबूलनामा वाला बयान और अन्य दस्तावेज अभियोजन की फाइल से कैसे गायब हो गए।

पुनिया ने कहा, “अदालत का संपूर्ण आदेश आने से पहले टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। लेकिन अदालत ने कहा है कि अभियोजन मामले को साबित करने में विफल रहा।”

‘भगवा आतंक’ शब्द का कभी प्रयोग नहीं किया : शिवराज पाटील

हैदराबाद की एक अदालत द्वारा 2007 के मक्का मस्जिद बम धमाका मामले में पांच आरोपियों बरी किए जाने के बाद पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री शिवराज पाटील ने सोमवार को कहा कि उन्होंने कभी भी ‘भगवा आतंक’ शब्द का प्रयोग नहीं किया। संवाददाताओं से बातचीत में पाटील (73) ने सवालिया लहजे में कहा कि क्या आरोपपत्र में ‘भगवा या हिंदू आतंक’ का जिक्र किया गया है।

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की सरकार के दौरान मई 2004 से नवंबर 2008 तक गृहमंत्री रहे पाटील ने पलटवार करते हुए कहा, “क्या मैंने कभी इसका प्रयोग किया? यह आतंकवाद का मामला है। क्या अदालत के आरोप पत्र में ये शब्द (भगवा या हिंदू) हैं?”

पूर्व गृहमंत्री पी. चिदंबरम और सुशील कुमार शिंदे और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह समेत वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं द्वारा इस आशय के दिए गए बयान के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “आपको यह सवाल उन लोगों से पूछना चाहिए जिन्होंने ऐसा कहा है।”

यह कहने पर कि यह सभी नेता उनकी कांग्रेस पार्टी के सदस्य हैं, पाटील ने जवाब में सवाल पूछा, “क्या कांग्रेस ने कभी इस आशय का कोई प्रस्ताव पास किया था?”

इससे पहले हैदराबाद के नामपल्ली में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अदालत ने ऐतिहासिक मक्का मस्जिद में 18 मई 2007 को हुए बम धमाके के मामले में आरोपी आठ हिंदू कार्यकर्ताओं में से पांच को आरोपमुक्त करार दे दिया। उस घटना में नौ लोगों की मौत हो गई थी और 50 से अधिक जख्मी हो गए थे।

अदालत ने हिंदू दक्षिणपंथी गुट अभिनव भारत के सदस्य नबकुमार सरकार ऊर्फ स्वामी असीमानंद, देवेंद्र गुप्ता, लोकेश शर्मा, भारत मोहनलाल रतेश्वर ऊर्फ भरत भाई और राजेंद्र चौधरी को उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने के आधार पर बरी कर दिया।

बाकी तीन आरोपियों में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक सुनील जोशी की मामले की जांच के दौरान ही हत्या हो गई थी।

दो अन्य आरोपी संदीप वी. डांगे और रामचंद्र कलसांगरा, दोनों आरएसएस के कार्यकर्ता हैं और वे जांच से बचने के लिए छिपे हुए हैं। ये दोनों महाराष्ट्र में आतंक के कुछ अन्य मामलों में भी वांछित हैं।

अदालत का फैसला आने के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कांग्रेस पर भगवा आतंक शब्द गढ़कर हिंदू धर्म को बदनाम करने का आरोप लगाया और इसके लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पूर्व कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी से माफी मांगने को कहा।

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