चुनाव आचार संहिता: PM मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में नगर निगम की बिल्डिंग हुई विवादित

चुनाव आचार संहिता: PM मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में नगर निगम की बिल्डिंग हुई विवादित
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चुनाव आचार संहिता: PM मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में नगर निगम की बिल्डिंग हुई विवादित

वाराणसी: चुनाव की घोषणा के साथ ही उत्तर प्रदेश में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो गई है। इसके बावजूद यूपी के कई जिलों से आचार संहिता के उल्लंघन की खबरें लगातार आ रही हैं। ऐसा ही एक मामला पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी मे भी तूल पकड़ता जा रहा है। जहां आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में बसपा और बीजेपी दोनों पार्टियों का नाम सामने आ रहा है।

क्या है पूरा मामला ?
-दरअसल वाराणसी की नगर निगम बिल्डिंग पर लखनऊ के अम्बेडकर पार्क की ही तरह दीवारों पर हाथी की आकृति बनी हुई है।
-वहीं दूसरी तरफ इसी बिल्डिंग की दीवारों पर कमल का फूल भी बना हुआ है।
-अब इस मुद्दे को लेकर विपक्षी पार्टियां विरोध कर रही हैं।
-उनका मानना है कि हाथी बसपा और कमल बीजेपी का चुनाव चिह्न है।
-दीवारों पर इनकी आकृतियों का होना भी चुनाव आचार संहिता के उल्लघंन में ही आता है।
-विपक्षी पार्टियों का कहना है कि इससे बीजेपी और बसपा को प्रचार में मदद मिलेगी।
-लिहाजा इसे अस्थायी तौर पर ढक देना चाहिए।

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क्या कहना है नगर आयुक्त का ?
-नगर आयुक्त हरि प्रताप शाही का कहना है कि यह मामला कहीं से भी चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का नहीं है।
-उनका कहना था कि ये आपत्ति पूरी तरह से निराधार है।
-दीवारों पर बनीं हाथी और कमल की आकृतियां बिल्डिंग के निर्माण के समय ही बनाई गई थीं।
-इस कारण आपत्ति करने का कोई मतलब नहीं है।
-ऐसी स्थिति में इसे तोड़ा या हटाया नहीं सकता है।

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जिला निर्वाचन टीम का पक्ष 
जिला निर्वाचन टीम के सदस्य और एसीएम प्रथम डॉ. नागेंद्र नाथ यादव के मुताबिक, चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद किसी भी सरकारी भवन या सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी पॉलिटिकल पार्टी का झंडा, बैनर, होर्डिंग या पोस्टर नहीं लगाया जा सकता क्योंकि चुनाव के समय इससे जनता प्रभावित होती है। इस लिहाज से इन्हें या तो पूरी तरह से ढक देना चाहिए या हटा लेना चाहिए। बता दें कि मंगलवार (10 जनवरी) को चुनाव आयोग ने भी इस संबंध में दिशा निर्देश पारित किए हैं।

क्या होती है चुनाव आचार संहिता ?
चुनाव आचार संहिता या आदर्श आचार संहिता का अर्थ है चुनाव आयोग के वह निर्देश जिनका पालन चुनाव की समाप्ति तक हर पॉलिटिकल पार्टी और उसके कैंडिडेट्स को करना होता है। अगर कोई कैंडिडेट इन नियमों का उल्लंघन करता है तो चुनाव आयोग उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकता है। ऐसी कार्रवाई में कैंडिडेट को चुनाव लड़ने से रोका जा सकता है, कैंडिडेट के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो सकती है और दोषी पाए जाने पर उसे जेल भी जाना पड़ सकता है। राज्यों में चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही वहां चुनाव आचार संहिता भी लागू हो जाती हैं।

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