लखनऊ:  गवर्नर राम नाईक ने राज बब्बर को दिया कड़ा जवाब कहा- राजभवन की वाणी पर विराम नहीं लगा है, न हीं मेरी कोई मजबूरी है और नहीं मैं चुप हूँ। जी हाँ, कुछ इन्हीं वाक्यों के साथ राम नाईक ने राज बब्बर के उस पत्र का जवाब दिया है। इतना ही नहीं गवर्नर ने राजबब्‍बर को लिखे पत्र को उसी तरीके से सार्वजनिक किया है, जैसा राजबब्‍बर ने किया था।

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राजबब्‍बर ने उठाए थे राजभवन पर सवाल

राजबब्‍बर ने अपने पत्र में कहा था, कि आखिरकार राज्यपाल की कैसी मजबूरी है, जिसकी वजह से वह चुप हैं। मज़े की बात यह है, कि उन्होंने पत्र में यह भी जिक्र करते हुए लिखा है, कि आपने मुझे अपना पत्र प्रसार माध्यमों को भेजा था। इसलिए मैं भी इस पत्र की प्रति प्रसार माध्यमों को उपलब्ध करा रहा हूँ। राम नाईक ने जवाब के साथ में दीपावली की मंगलकामनाएं और नूतन वर्ष की शुभकामनाएं भी दी है। उनका यह चुटीला पत्र सियासी गलियारों में चटखारे लेकर पढ़ा जा रहा है।

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राज्यपाल राम नाईक ने फिल्म अभिनेता से नेता बने काँग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर को उन के पत्र के जवाब में कडा पत्र लिखा है। इस पत्र में राजबब्बर की भाषा की आलोचना करते हुए गवर्नर ने लिखा है, कि क़ानून व्यवस्था पर उन की निगाह है और वो सीएम से इस पर चर्चा करते रहते हैं। इससे पहले राजबब्बर ने राम नाईक को चिठ्ठी लिख कर प्रदेश में खराब क़ानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए राजभवन की चुप्पी पर सवाल खड़े किये थे। राजबब्बर की चिठ्ठी का जवाब भी राम नाईक ने उन्ही के अंदाज़ में सार्वजनिक कर दिया है।