नई दिल्ली: वांछित भगोड़े शराब व्यापारी विजय माल्या ने हाल ही में एक बयान दिया था, जिसके बाद भारतीय राजनीति में भूचाल आ गया। बता दें, बुधवार को माल्या ने कहा था कि देश छोड़ने से पहले उनकी वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात हुई थी। ऐसे में अब विपक्ष एकजुट होकर जेटली का इस्तीफा मांग रहा है।

यह भी पढ़ें: माल्या प्रत्यर्पण मामला: कांग्रेस नेता ने कहा- झूठ बोल रहे जेटली, मैंने देखी दोनों की मुलाकात

यही नहीं, अब इस मामले में एक नया मोड़ आया है। दरअसल, अब केंद्र की मोदी सरकार पर ये आरोप लगाया जा रहा है कि माल्या के खिलाफ जारी हुए लुकआउट सर्कुलर को मोदी सरकार ने हल्का बना दिया। ऐसी स्थिति में माल्या के लिए देश छोड़कर भागना आसान हो गया। इस मुद्दे को लेकर बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने खुद भी एक ट्वीट किया है।

जानकारी के अनुसार, जब पहली बार माल्या के खिलाफ 16 अक्टूबर, 2015 को लुकआउट नोटिस जारी हुआ था तब सीबीआई ने ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन से अनुरोध किया था कि अगर माल्या देश छोड़ने की कोशिश करता है तो उसे पकड़ लिया जाए। मगर इस लुकआउट नोटिस के ठीक एक महीने बाद सीबीआई ने एक संशोधित सर्कुलर जारी कर दिया।

इस संशोधित सर्कुलर में लिखा था कि अगर माल्या विदेश जाता है तो उसके इस प्लान के बारे में सीबीआई को सूचित कर दिया जाए। इस संशोधित सर्कुलर के जारी होने के बाद माल्या दो बार विदेश यात्रा पर गया और फिर तीसरी बार में वो फरार ही हो गया। इसके बाद सीबीआई के हर भरसक प्रयास करने के बाद भी वो इंडिया आने को तैयार नहीं।

जब वित्त मंत्री अरुण जेटली को लेकर माल्या ने दिया बयान

वांछित भगोड़े शराब व्यापारी विजय माल्या ने बुधवार को दावा किया कि 2016 में भारत छोड़ने से पहले उसने वित्तमंत्री अरुण जेटली से मुलाकात की थी।

माल्या ने वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट के बाहर पत्रकारों से कहा, “मेरी जेनेवा में एक बैठक प्रस्तावित थी। भारत छोड़ने से पहले मैंने वित्तमंत्री से मुलाकात की थी।।बैंकों के साथ मामला निपटाने का अपना प्रस्ताव मैंने दोहराया था। यह सच है।”

जेटली ने माल्या के दावे को खारिज किया

हालांकि, केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को विजय माल्या के उस दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें भगोड़े व्यापारी ने दो साल पहले भारत छोड़ने से पहले उनसे मुलाकात करने की बात कही है।

जेटली ने कहा कि उन्होंने 2014 के बाद मुलाकात के लिए माल्या को कभी समय नहीं दिया और “मुझसे मुलाकात का प्रश्न ही नहीं उठता।”

उन्होंने कहा, “हालांकि, वह राज्यसभा के सदस्य थे और कभी-कभार संसद आया करते थे। एक बार जब मैं सदन से अपने कक्ष में जा रहा था, उन्होंने विशेषाधिकार का फायदा उठाया।”

मंत्री ने कहा, “वह तेजी से मेरी तरफ आगे बढ़े और एक वाक्य कहा कि ‘मैं सेटलमेंट का ऑफर दे रहा हूं’।” जेटली ने कहा कि चूंकि वह उनके पहले के झूठे वादों को जानते थे, “इसलिए मैंने उन्हें आगे बातचीत करने की इजाजत नहीं दी।”