पौष पूर्णिमा आज: संगम में लाखों श्रद्धालु लगा रहे आस्था की डुबकी, कल्पवास शुरू

मोक्ष की कामना रखने वालों के लिए यह दिन बेहद खास होता है। इस तिथि को सूर्य और चंद्रमा के संगम भी कहा जाता है, क्योंकि पौष का महीना सूर्य देव का माह होता है और पूर्णिमा चंद्रमा की तिथि है।

प्रयागराज: संगम तट में लगे आस्था के सबसे बड़े आयोजन माघ मेले का आज दुसरा सबसे बड़ा स्नान पर्व पौष पूर्णिमा है। तड़के सुबह से यहाँ लाखो लोग आस्था की डुबकी लगाने पहुच रहे है। आज से ही संगम तट मे कल्पवास का आरम्भ भी हो रहा है।

आज ही से संगम तट में पांच लाख से अधिक श्रद्धालु एक महीने के लिए त्रिवेणी के तट की रेती में बने तम्बुओ के अस्थायी शहर में एक महीने के लिए बसकर अपना कल्पवास भी शुरू कर रहे है। कल्पवासियों का भी आज पहला स्नान है जिसके बाद वह एक महीने तक इसी संगम तट में रोज दो वक्त स्नान कर संयम नियम के साथ पूजा अर्चना करते रहेंगे।

पौष पूर्णिमा से ही माघ का महीना भी आरमभ हो जाएगा। कड़ाके की ठण्ड और खराब मौसम के बाद भी संगम में डुबकी लगाने कल्पवासियों के अलावा भी बड़ी तादाद में दूसरे श्रद्धालु भी पहुच रहे है जिनकी सुरक्षा के लिए प्रशासन ने चाक चौबंद प्रबंध किये है।

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पुलिस ने किए सुरक्षा के खास इंतजाम

उत्तर प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) आनंद कुमार ने बताया कि पुलिस का मुख्य उद्देश्य कुंभ मेले को सुरक्षित तरीके से सम्पन्न कराना है और इसके लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है।

उन्होंने बताया कि पौष पूर्णिमा को होने वाले स्नान में 70 लाख श्रद्धालुओं के संगम में डुबकी लगाने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसके लिये सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा कर्मियों की यही कोशिश है कि कुंभ 2019 सुरक्षा के लिहाज से अब तक का सबसे सफल कुंभ साबित हो।

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माघी पूर्णिमा के स्नान के बाद कल्पवासियों की होगी विदाई

पौष पूर्णिमा यानि आज के ही दिन से संगम नगरी में कल्पवासी अपना डेरा सजाने लगते हैं। असके बाद वह आस्था के सबसे बड़े मेले महाकुम्भ में देवोंं की आराधना और पूजन व दान कर पुण्य कमाते हैं। साथ ही माघी पूर्णिमा के दिन डुबकी लगाने के बाद कल्पवासी यहां से विदा होते हैं। संगम तट पर कल्पवासी शिविरों में कथा व भोज श्रद्धालुओं के लिए आयोजित किया गया है। कल्पवास के 12 वर्ष पूरे करने वाले कल्पवासी सेजिया दान कर रहे हैं।

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