कल्पवास

गंगा यमुना और अदृश्य सरस्वती के अविरल धारा की गूंज, कहीं मंत्रों के उच्चारण तो कहीं संख और घण्टे की ध्वनि लोगों के बीच आध्यात्म के आकषण का केंद्र है। यह तीर्थों के राज प्रयागराज की महिमा है। जिसका उल्लेख ब्रह्मवर्त पुराण में भी मिलता है।

मोक्ष की कामना रखने वालों के लिए यह दिन बेहद खास होता है। इस तिथि को सूर्य और चंद्रमा के संगम भी कहा जाता है, क्योंकि पौष का महीना सूर्य देव का माह होता है और पूर्णिमा चंद्रमा की तिथि है।

इस बार महाकुंभ में एक ओर जहां धार्मिक अनुष्ठान और मंत्रोच्चार गूंजेगा, वहीं दूसरी ओर विदेशी लोक कला संस्कृति का अनूठा संगम सजेगा। एक जानकारी के मुताबिक इस बार 12 हजार कलाकार कार्यक्रम में भाग लेंगे। इस दौरान कला संगीत और पारंपरिक लोक कलाओं के रंग दिखेंगे।