CBI निदेशक पद से हटाए गए आलोक वर्मा ने नौकरी से दिया इस्तीफा

सीबीआई के निदेशक पद से हटाए जाने के बाद आलोक वर्मा ने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया है। आलोक वर्मा ने सरकार को अपना इस्तीफा भेज दिया है। इससे पहले आलोक वर्मा ने डीजी फायर सर्विसेज एंड होमगार्ड का पद संभालने से इंकार कर दिया था।

नई दिल्ली: सीबीआई के निदेशक पद से हटाए जाने के बाद आलोक वर्मा ने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया है। आलोक वर्मा ने सरकार को अपना इस्तीफा भेज दिया है। इससे पहले आलोक वर्मा ने डीजी फायर सर्विसेज एंड होमगार्ड का पद संभालने से इंकार कर दिया था।

पीएम की अध्यक्षता में चयन समिति ने हटाया था

गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने उन्हें सीबीआई चीफ के पद से हटा दिया था और उनका तबादला बतौर डीजी फायर सर्विसेज एंड होमगार्ड कर दिया था।

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गौरतलब है कि DoPT सरकार का विभाग है जहां से सरकारी मशीनरी में टॉप अधिकारियों की नियुक्ति होती है। गुरुवार को जब सीबीआई के निदेशक की नियुक्ति करने वाली चयन समिति की बैठक हुई थी तो इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एके सीकरी और कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल थे।

आलोक वर्मा ने कही है ये बात

DoPT के सचिव श्री चंद्रमौली को लिखे पत्र में आलोक वर्मा ने कहा है कि उन्हें सीबीआई के पद से हटाने से पहले सफाई का मौका नहीं दिया गया। आलोक वर्मा ने कहा है कि इस पूरी प्रक्रिया में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की अवहेलना की गई है। आलोक वर्मा ने कहा कि चयन समिति ने इस बात का ध्यान नहीं रखा कि सीवीसी की पूरी रिपोर्ट उस शख्स के बयान पर आधारित है जिसकी जांच खुद सीबीआई कर रही है।

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आलोक वर्मा अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश काडर से 1979 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। वह सीबीआई के 27वें निदेशक थे। वह दिल्ली पुलिस के कमिश्नर भी रह चुके थे। 31 जनवरी को वह रिटायर होने वाले थे। वर्मा 1 फरवरी 2017 को सीबीआई निदेशक बने थे। उनका कार्यकाल काफी विवादित रहा और आखिरकार भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर उन्हें 2 साल के तय कार्यकाल से पहले ही हटा दिया गया।

सीबीआई के दों अधिकारियों ने एक दूसरे पर लगाए हैं आरोप

वर्मा और सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना दोनों ने एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। बाद में अस्थाना के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हुई। यह विवाद इतना बढ़ा कि सरकार ने दोनों अफसरों को जबरन छुट्टी पर भेज दिया। इसके खिलाफ वर्मा सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और 8 जनवरी को कोर्ट ने उन्हें डायरेक्टर पद पर बहाल तो कर दिया लेकिन सिलेक्शन कमिटी को 1 हफ्ते के भीतर उन पर लगे आरोपों पर फैसले का भी निर्देश दिया।

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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई और कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे व सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस सीकरी की सदस्यता वाले पैनल ने वर्मा को डायरेक्टर पद से हटा दिया।