कांग्रेस में ‘राहुल राज’ शुरू, औपचारिक घोषणा के साथ बने पार्टी के नए मुखिया

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उमाकांत लखेड़ा
उमाकांत लखेड़ा

विनोद कपूर 
नई दिल्ली: गुजरात विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान से ठीक पहले कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पार्टी नए अध्यक्ष निर्वाचित हो गए हैं। दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय से इसकी औपचारिक घोषणा की गई। ज्ञात हो, कि आज (11 दिसंबर) ही नामांकन वापस लेने का आखिरी दिन भी था। इस पद के लिए अब तक सिर्फ राहुल गांधी ने ही नामांकन दाखिल किया था।

बता दें, कि नामांकन के दौरान राहुल की ओर से दाखिल किए गए सभी 89 सेट सही पाए गए। राहुल गांधी ने 4 दिसंबर को अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया था। बताया जा रहा है, कि राहुल 17 सितंबर को सभी कांग्रेस नेताओं और पार्टी के सांसदों के लिए रात्रिभोज का आयोजन करेंगे।

गुजरात में वोटिंग और खरमास भी वजह
इससे पहले खबर थी कि राहुल 14 दिसंबर को आधिकारिक रूप से अध्यक्ष पद संभालेंगे, लेकिन उसी दिन गुजरात में वोटिंग है, इसलिए कुछ नेताओं ने इस दिन ताजपोशी पर सहमति नहीं दी। इसके अलावा कुछ नेताओं का तर्क था कि चूंकि 16 तारीख से खरमास लग रहा है और हिंदू परंपरा में इस समय शुभ काम नहीं किए जाते हैं। इसलिए पर उहापोह की स्थिति बरकरार थी।

इससे पहले 1 से 4 दिसंबर तक नामांकन भरने, 5 को स्क्रूटनी, एक से ज्यादा नॉमिनेशन होने पर 16 को वोटिंग और 19 को नतीजे जारी होने की तारीख तय की गई थी। राहुल गांधी अध्यक्ष पद संभालने वाले नेहरू-गांधी परिवार के छठे और कांग्रेस के 60 वें सदस्य होंगे। पार्टी में 7 साल बाद हो रहे चुनाव में वह मां सोनिया गांधी की जगह लेंगे।

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कभी 90 प्रतिशत पर करते थे राज, आज महज 10 फीसदी
राहुल सबसे मुश्किल दौर में पार्टी प्रेसिडेंट बन रहे हैं, जब देश के महज 10 फीसदी हिस्से में कांग्रेस का शासन रह गया है। राहुल को गुजरात में जीत की उम्मीद है। साल 1951 यानी जवाहरलाल नेहरू के वक्त देश के 90 प्रतिशत हिस्से पर कांग्रेस का शासन था। तब कांग्रेस के पास लोकसभा की 489 में से 364 सीटें थीं। 1969 में इंदिरा गांधी के वक्त भी देश के 90 फीसदी हिस्से पर कांग्रेस का शासन था। तब कांग्रेस के पास लोकसभा की 494 में से 371 सीटें थीं।

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लोकसभा में थी कभी 415 सीटें, अब 46 पर सिमटे
1985 में राजीव गांधी के पीएम बनने के बाद कांग्रेस का देश के 67 प्रतिशत हिस्से पर शासन था। उस वक्त कांग्रेस के पास लोकसभा की 542 में से 415 सीटें थीं। 1998 में सोनिया गांधी के पार्टी अध्यक्ष पद संभालने के समय कांग्रेस का देश के 19 फीसदी इलाके पर शासन था। तब कांग्रेस के पास लोकसभा की 543 में से 141 सीटें थीं। अब जब राहुल कांग्रेस के अध्यक्ष बनने जा रहे हैं, तब कांग्रेस के पास लोकसभा में 543 में से सिर्फ 46 सीटें हैं।

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इतिहास राहुल के खिलाफ
कांग्रेस में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनने वाले राहुल तीसरे नेता हैं। उनसे पहले उपाध्यक्ष रहे दो नेताओं का पॉलिटिकल करियर ज्यादा ऊंचाई हासिल नहीं कर पाया। 1986 में अर्जुन सिंह और 1997 में जितेंद्र प्रसाद इस पद पर रहे थे, लेकिन दोनों किसी और ऊंचे मुकाम पर नहीं पहुंच पाए।

कांग्रेस में 44 साल प्रेसिडेंट रहा नेहरू-गांधी परिवार
कांग्रेस के 132 साल के इतिहास में नेहरू-गांधी परिवार 44 साल अध्यक्ष रहा। इन 44 सालों में से 25 साल मोतीलाल से राजीव गांधी तक कांग्रेस प्रेसिडेंट रहे। परिवार में जवाहर लाल नेहरू सबसे कम 40 साल की उम्र में, तो सोनिया सबसे ज्यादा 52 की उम्र में अध्यक्ष बनीं।

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सोनिया बन सकती हैं मुख्य संरक्षक
सोनिया गांधी कांग्रेस में मुख्य संरक्षक की भूमिका में रह सकती हैं। पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने 20 नवंबर को कहा था, ‘सोनिया जी हमारी नेता और मार्गदर्शक हैं। उनका कुशल नेतृत्व और दिशा-निर्देश हमेशा उपलब्ध रहेगा।’

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