लखनऊ : एक क्रिकेटर जो सेनापति भी था। वो भी सच्ची-मुच्ची की आर्मी का। आपको पता नहीं होगा। लेकिन हम सच बोल रहे हैं। क्योंकि ये उन दिनों की बात है जब इंडिया में क्रिकेट को टेस्ट क्रिकेट का स्टेटस भी नहीं मिला था। बात 1932 के पहले की है। क्रिकेटर का नाम है कर्नल सीके नायडू। सेनापति वाली बात समझ में आई…क्या बात कर रहे हैं नहीं आई। तो पढ़िए! नायडू होल्कर की आर्मी में सेनापति थे। आज बड्डे है उनका। तो जानिए क्या खास है उनमें जो आज के खिलाडियों को भी जानना जरुरी है।

31 अक्टूबर 1895 को नागपुर में पैदा हुए सीके ने 1915 से क्रिकेट खेलना शुरू किया और अगले लगभग 50 साल तक खेलते रहे। सीके ने सिर्फ 7 इंटरनेशनल मैच ही खेले। लेकिन 207 फर्स्ट क्लास मैच में उन्होंने 35.94 के औसत से 11825 रन बनाए। इसमें 26 सेंचुरी और 58 हाफ सेंचुरी शामिल हैं। ऑफ-ब्रेक स्पिनर के तौर पर उन्होंने 411 विकेट भी लिए। 1956-57 में उन्होंने अपना आखिरी रणजी मैच 62 साल की उम्र में खेला।

ये भी पढ़ें…Big B ने जाने क्यों इस खिलाड़ी के लिए ट्विटर पर लिखा ये भावुक पोस्ट

ये भी पढ़ें…इंडिया रेड: डोप में प्रतिबंधित हुए अभिषेक का स्थान लेगा ये खिलाड़ी

ये भी पढ़ें…आर्थिक तंगी से जूझ रही इस खिलाड़ी की मदद करने को आगे आए सीएम योगी, दी इतनी धनराशि

हम बात शुरु करते हैं 1926 से। उस समय इंग्लैंड से मेरिलबोन क्रिकेट क्लब की टीम इंडिया आई थी। इसमें इंग्लैंड के कई धाकड़ क्रिकेटर शामिल थे। उस समय इंडिया में हिंदू, पारसी, मुस्लिम और अन्य की अलग-अलग टीमें हुआ करती थीं। एक दिसंबर को हिंदू टीम और एमसीसी के बीच बॉम्बे जिमखाना में क्रिकेट मैच हुआ। इस मैच में  सीके नायडू ने 153 रनों की धागा खोलने वाली पारी खेली। अपनी इस इनिंग में उन्होंने 11 छक्के और 13 चौके मारे। अंग्रेज सिर्फ प्लेयर सिर्फ दर्शक बने रहे इस इनिंग के दौरान। नायडू ने छक्के मारने का नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया था।

इंडिया से जाने से पहले गोरों की टीम के कप्तान गिलिगन ने पटियाला के राजा भूपिंद्र सिंह से कहा अब इंडिया क्रिकेट की दुनिया में आने को तैयार है। आपको बड़े कदम उठाने होंगे। उस समय भूपिंद्र ही इंडियन क्रिकेट के सर्वेसर्वा थे। इसके बाद 1928 में बीसीसीआई का गठन हुआ। 1932 में सीके नायडू नई नवेली टीम के कप्तान बने और टीम का इंग्लैंड दौरा हुआ।

सीके नायडू ने यहां इतना लंबा छक्का मारा कि गेंद दूसरी काउंटी में जाकर गिरी। ये मैच इंग्लैंड की काउंटी वॉरविकशायर और वॉस्टरशायर के बॉर्डर के एक मैदान में हो रहा था और दोनों के बीच एक नदी थी गेंद नदी पार कर गई थी।

उस दौर में 95 यार्ड्स की बाउंड्री हुआ करती थी और अपने हीरो उससे भी 15 फीट बाहर छक्के मारते थे। एक बार सीके नायडू बॉम्बे यूनिवर्सिटी मैदान पर खेल रहे थे। इस दौरान उन्होंने के छक्का मारा तो गेंद मैदान के बाहर राजाबाई क्लॉक टावर पर लगी और घड़ी टूट गई।