HEALTH:शरीर के इस हिस्से के दर्द को न करे नजरअंदाज, रहे सावधान

जयपुर:पेट के निचले हिस्से का दर्द महिलाओं को पीरियड्स के दौरान या लंबे समय तक बैठे रहने के कारण अक्सर होता है। पेट के निचले हिस्से के दर्द को मेडिकल भाषा में पीसीएस कहते हैं। इसका अर्थ है पेल्विक कंजेशन सिंड्रोम। इस दर्द से परेशान हर तीन में से एक महिला होती है। जागरूक रहकर व समय पर डाक्टरी जांच करवाकर और इलाज द्वारा हम इस दर्द से छुटकारा पा सकते हैं। पीसीएस जांघों, नितंब या योनि क्षेत्र की वैरिकोस वेन्स से संबंधित होता है। इस बीमारी मे नसें सामान्य से अधिक खिंच जाती हैं और इस कारण दर्द होता है। पेल्विक कंजेशन सिंड्रोम कम उम्र की महिलाओं में अधिक देखा गया है। इस बीमारी से पीडि़त महिला को पेट के निचले हिस्से में काफी दर्द होता है। खड़े होने पर यह दर्द और बढ़ जाता है। अगर दर्द से परेशान महिला कुछ समय के लिए लेट कर आराम करें तो दर्द में राहत मिलती है। जो महिलाएं मां बन चुकी हैं और उनकी उम्र ज्यादा नहीं है उन्हें पीसीएस समस्या ज्यादा होती है। अक्सर उस उम्र की महिलाएं इस दर्द को नजरअंदाज करती रहती हैं जिससे समस्या और बढ़ जाती है।

कारण शारीरिक रचना या हार्मोंस के स्तर में किसी प्रकार की गडग़ड़ी के कारण पीसीएस की समस्या हो सकती है। यह अधिकतर 20 से 45 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं को परेशान करती है। गर्भावस्था के दौरान आए हार्मोन संबंधी बदलाव के कारण होती है। इसमें महिला का वजन बढ़ जाता है और इसका प्रभाव पेल्विक क्षेत्र पर पड़ता है।इससे नसों पर प्रभाव बढ़ता जिससे नसों की दीवार सामान्य से कमजोर हो जाती है। जिससे पेडू का दर्द बढ़ जाता है। पीसीएस का दर्द पेडू के हिस्से पर दोनों नितंबों के बीच होता है।

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पेट के निचले भाग में दर्द होना।अधिक देर तक खड़े रहने या बैठने से दर्द का बढऩा। पेट के निचले हिस्से में मरोड़ अनुभव होना। पेल्विक क्षेत्र में दबाव या भारीपन महसूस होना।  शारीरिक संबंध बनाते समय दर्द होना।मल और पेशाब त्यागते समय दर्द होना। व्यायाम करते समय या लंबी सैर करते समय दर्द होना।

उपाय
पीसीएस का दर्द कंट्रोल करने के लिए एक छोटी सी सर्जरी की कई बार डाक्टर सलाह देते हैं। वैसे लाइफ स्टाइल में बदलाव लाकर भी दर्द पर काबू पाया जा सकता है।खुराक:- खुराक में रेशेदार खाद्य पदार्थ का सेवन अधिक करें जिससे कब्ज की शिकायत न हो क्योंकि कब्ज से भी समस्या बढ़ती है। डाइट में साबुत दालें, अनाज, बींस, रेशेदार फलों का सेवन,खीरा,टमाटर, हरी पत्तेदार सब्जियों का पर्याप्त सेवन करें। पानी अधिक से अधिक पिएं। हर्बल टी का सेवन दिन में एक बार करें।चाय,काफी, कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन कम कर दें। नियमित व्यायाम से पेल्विक क्षेत्र में खून का प्रवाह बढ़ेगा जिससे दर्द में राहत मिलेगी। तैराकी, साइकलिंग, वाकिंग नियमित कर इस पर काबू पा सकते हैं। जब दर्द हो रहा हो तो थोड़ी देर लेट कर आराम करें।