महिलाओं को 31-35 की उम्र के बाद रहना है सावधान, इस गंभीर बीमारी का रहता है खतरा

जयपुर:सवाईकल कैंसर महिलाओं से जुड़ी बीमारी है, जो कि बच्चेदानी में कोशिकाओं के बढ़ने की वजह से होती है। ज्यादातर सवाईकल कैंसर के मामले फ्लैटंड और स्क्वैश कोशिकाओं की बढ़ोत्तरी के कारण होते हैं। यह कैंसर ह्यूमन पैपीलोमा वायरस(एचपीवी) की वजह से होता है। इस कैंसर से बचाव के लिए इसके बारे में पूरी जानकारी होना जरूरी है। पैथोलॉजी लैब एसआरएल डायग्नॉस्टिक्स की ओर से सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग के लिए एचपीवी यानी ह्यूमन पैपीलोमा वायरस जांच में पता चला है कि 31-45 आयुवर्ग की महिलाओं में हाई-रिस्क एचपीवी के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। इसके बाद 16-30 की उम्र के 30 फीसदी मामलों में हाई-रिस्क एचपीवी पॉजिटिव पाया गया है। इस कैंसर पर किए गए एक शोध में ये पता चला है कि यह सबसे ज्यादा 35 साल की उम्र के बाद होता है।

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एचपीवी के फैलने का सबसे बड़ा कारण यौन संपर्क है। ज्यादातर लोग यौन क्रिया शुरु करने के कुछ ही समय बाद एचपीवी से संक्रमित हो जाते है। 2014 से 2018 के बीच देशभर में 4500 महिलाओं की जांच हुई। इनमें से 8 फीसदी महिलाएं हाई-रिक्स एचपीवी की शिकार थी। एक स्टडी के अनुसार एचपीवी वायरसों का एक समूह है, जो दुनिया भर में आम है। इसके 100 से ज्यादा प्रकार हैं, जिनमें से 14 कैंसर कारक है।

सर्वाइकल कैंसर यौन संचारी संक्रमण है, जो विशेष प्रकार के एचपीवी से होता है। सवाईकल कैंसर दुनिया भर में महिलाओं की बीमारियों से हो रही मौत का सबसे बड़ा कारण है। एक अध्ययन में पता चला है कि सवाईकल कैंसर से होने वाली मौतों की दर 7.5 फीसदी है।एक अनुमान के मुताबिक सर्वाइकल कैंसर कम विकसित क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं में कैंसर का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। 2018 में सवाईकल कैंसर की वजह से 3 लाख 11 हजार महिलाओं की मौत हो चुकी है, जिनमें से 85 फीसदी से ज्यादा मौतें निम्न और मध्यम आयु वर्ग में हुई है। लेकिन अगर शुरुआत में ही सवाईकल कैंसर का पता चल जाएं, तो इसका इलाज हो सकता है।  सर्वाइकल कैंसर और प्रीकैंसेरियस घाव के 70 फीसदी मामलों का कारण दो प्रकार के एचपीवी (16 और 18) होते हैं।” बयान के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर दुनिया भर में महिलाओं में कैंसर के कारण होने वाली मौतों का चौथा सबसे बड़ा कारण है। इंटरनेशनल एजेन्सी फॉर रीसर्च ऑफर कैंसर द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, इसके मामलों की दर 6.6 फीसदी तथा मृत्यु दर 7.5 फीसदी है। मानव विकास सूचकांक में सर्वाइकल कैंसर के मामलों और इसके कारण मृत्यु दर स्तन कैंसर के बाद दूसरे स्थान पर है।बयान के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए मुख्य टेस्ट हैं- पारम्परिक ‘पैप स्मीयर’ और ‘लिक्विड बेस्ड सायटोलोजी टेस्ट’, ‘विजुअल इन्स्पैक्शन विद एसीडिक एसिड’ और एचपीवी टेस्टिंग फॉर हाई रिस्क एचपीवी टाईप।