…जब सुरों की दरिया में बह गई यूपी के आईएएस अफसरों की शाम

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लखनऊ : जी हां खबर का शीर्षक पढ़कर आप भी चौंके होंगे। पर रविवार की शाम यही नजारा पेश हुआ। महफिल एक प्रशासनिक अफसर ने सजाई थी। श्रोता भी प्रशासनिक अफसर थे। आईएएस डा हरिओम मंच पर संगत बिठाए बैठे थे। ऐसा कम ही देखने को मिलता है। मैं सिकन्दर हूं, मगर हारा हुआ हूं…से जब उन्होंने खुशनुमा शाम को छेड़ा तो यूपी के बड़े-बड़े ओहदेदार सुरों की दरिया में खुद को गोते लगाने लगे। संगीत के मंझे हुए खिलाड़ी की तरह उन्होंने कई गजलें छेड़ कर भावनाओं के उतार-चढ़ाव का एहसास भी कराया।
गोमतीनगर स्थित एक होटल में एल्बम ‘रंग का दरिया’ की लांचिंग के मौके पर चीफ सेक्रेटरी राजीव कुमार, प्रमुख सचिव गृह अरविन्द कुमार, अपर मुख्य सचिव पंचायतीराज चंचल तिवारी समेत राज्य की ब्यूरोक्रेसी के वरिष्ठ अफसर मौजूद थे। डा हरिओम के पिता चन्द्रमा प्रसाद ने गीत के जरिए आशीर्वाद देते हुए संगीतमय शाम की शुरूआत की। रिटायर आईएएस अनीस अंसारी ने भी गजल पेश किया।
डिजिटली लांच हुआ ‘रंग का दरिया’
 ‘रंग का दरिया’ एलबम पहले डिजिटली लांच किया गया। फिर डा हरिओम ने गजलों का लाइव परफार्मेंस दिया। छह गजल वाले इस वीडियो की पहली गजल रिटायर आईएएस अनीस अंसारी ने लिखी है। यह डा हरिओम का चौथा एलबम है। इसके पहले उनके गाए ‘रंग पैराहन’, ‘​इंतिसाब’ और ‘रोशनी के पंख’ एलबम आ चुके हैं। उनके गजल संग्रह ‘धूप का परचम’, ‘ख्वाबों की हंसी’ भी खूब वाहवाही लूट चुका है। ‘कपास के अगले मौसम में’ उनकी कविता संग्रह है।

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