मध्य प्रदेश में पांच साल में राजनीतिक दलों की संख्या में 82 फीसदी का इजाफा

कुल 86 फिर से निर्वाचित विजेताओं में से कोई भी अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्र में 20% से कम वोट शेयर के साथ नहीं जीता है। इनमें 27 विजेता (31%) 50% से अधिक के वोट शेयर के साथ जीते हैं। मध्य प्रदेश में नोटा में 5, 42,295 वोट पड़े थे।

लखनऊ: नेशनल इलेक्शन वाच के ताजा सर्वे के अनुसार मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 में, 120 राजनीतिक दल और निर्दलीय मैदान में थे। इनमें, 5 राष्ट्रीय राजनीतिक दल, 6 राज्य राजनीतिक दल और 109 पंजीकृत गैर मान्यता प्राप्त दल थे। इसकी तुलना में, 2013 में मध्य प्रदेश राज्य विधानसभा चुनाव के दौरान, 66 राजनीतिक दल मैदान में थे। इनमें, 6 राष्ट्रीय राजनीतिक दल, 9 राज्य राजनीतिक दल और 51 पंजीकृत गैर मान्यता प्राप्त दल थे। यह दर्शाता है कि 2013 से 2018 में चुनाव लड़ने वाले राजनीतिक दलों की संख्या में 82% की वृद्धि हुई है।

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जबकि 2013 के विधानसभा चुनाव में 72.5% मतदान हुआ था वहीं 2018 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में मामूली बढ़त के साथ 75.5% मतदान हुआ था। 2018 में मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के विजेताओं ने कुल पड़े वोटों में 46.6 प्रतिशत के औसत से जीत हासिल की जबकि 2013 में जीत का औसत 47.3 प्रतिशत रहा था।

नेशनल इलेक्शन वाच के सर्वे के मुताबिक 2018 के चुनाव में 83 विजेताओं यानी 36 प्रतिशत ने 50फीसद या उससे अधिक मतों के अंतर से चुनाव जीता। भाजपा के कुल 109 विजेताओं में से 71 यानी 65 प्रतिशत ने अपने निर्वाचन क्षेत्रों में कुल मतों के 50% से कम के साथ जीत हासिल की। कांग्रेस के 114 विजेताओं में से 69 यानी 61 प्रतिशत, बसपा व सपा से एक एक यानी 100 प्रतिशत विजेता और स्वतंत्र प्रत्याशियों में चार यानी सौ प्रतिशत विजेता अपने निर्वाचन क्षेत्र में कुल मतों के 50% से कम अंतर के साथ जीते।

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आपराधिक मामलों की घोषणा करने वाले 94 विजेताओं में से 42 (45फीसद) पचास फीसद या उससे अधिक मतों से जीते। इसी तरह 187 करोड़पति विजयी प्रत्याशियों में से 74 (40%) पचास फीसद या उससे अधिक मतों के अंतर से जीते।दस प्रत्याशी एक हजार मतों से कम के अंतर से जीते जबकि पांच प्रत्याशी 30 फीसद मतों के अंतर से जीते।

घोषित आपराधिक मामले और विजय के अपने मार्जिन के साथ विजेता:

आपराधिक मामलों की घोषणा करने वाले 94 में से 55 विजेताओं ने साफ सुथरी छवि के प्रत्याशी पर जीत हासिल की। इन 55 विजेताओं में, 10 विजेताओं की जीत की मार्जिन 20% से अधिक रही। इनमें डाबरा निर्वाचन क्षेत्र से सुश्री इमरती देवी (आईएनसी) की जीत की मार्जिन 38% रही।

187 में से 35 करोड़पति विजेताओं ने गैर करोड़पति प्रत्याशियों के खिलाफ जीत हासिल की। इन 35 विजेताओं के अलावा, 5 विजेताओं की जीत की मार्जिन 20% से अधिक रही। 30 गैर करोड़पति विजेताओं ने करोड़पति प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ जीत हासिल की। उनमें से केवल एक विजेता 20% से अधिक औसत से जीते हैं।

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230 विजेताओं में 21 महिलाएं हैं। दो महिला विजेताओं, अर्थात् कलावती भूरिया (आईएनसी) और रामबाई गोविंद सिंह (बसपा) 40% से कम वोट शेयर के साथ जीती हैं। इन महिला विजेताओं के अलावा, भंडार निर्वाचन क्षेत्र से सुश्री रक्षा संतराम सरोनिया (आईएनसी), 62% के उच्चतम वोट शेयर के साथ जीती है। कुल 86 फिर से निर्वाचित विजेताओं में से कोई भी अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्र में 20% से कम वोट शेयर के साथ नहीं जीता है। इनमें 27 विजेता (31%) 50% से अधिक के वोट शेयर के साथ जीते हैं। मध्य प्रदेश में नोटा में 5, 42,295 वोट पड़े थे।