लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने आठ साल पहले कक्षा सात  में पढ़ने वाली ग्यारह वर्षीय एक नाबालिग बच्ची के साथ बलात्कार करने और बाद में उसकी पीट पीटकर और गला घोंटकर निर्मम हत्या करने वाले 31 वर्षीय पड़ोसी युवक पुतई को अपर सत्र न्यायालय से मिली फांसी की सजा को बरकरार रखते हुए उसे मिली फांसी की सजा पर शुक्रवार को मुहर लगा दी है। इसके अलावा कोर्ट ने पुतई के साथ रेप में शामिल रहे दिलीप को मिली उम्रकैद की सजा को भी उचित ठहराया है। केर्ट ने सजा के खिलाफ दोनों की ओर से अलग अलग दायर अपीलों को भी खारिज कर दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जिस प्रकार बच्ची से बर्बर तरीके से रेप किया गया और बाद में उसे मार भी दिया गया उससे अपीलार्थी किसी सजा में किसी नरमी के हकदार नहीं हैं।

 

2012 में हुई थी वारदात

 

बच्ची के पिता मुन्ना ने घटना की रिपोर्ट 5 सितम्बर 2012 को लखनऊ के मोहनलालगंज थाने पर  रिपोर्ट लिखायी थी। रिपोर्ट में पिता ने कहा था कि उसकी बेटी एक दिन पहले शाम को शौच के लिए अकेली घर से निकली थी। जब वह काफी देर तक नहीं लौटी तो वे सब उसे ढूढ़ने निकले परंतु वह नहीं मिली। अगले दिन उसका नग्न शव एक खेत में मिला। शव की दशा से ही लग रहा था कि उसके रेप किया गया है और उसके बाद उसे मारा गया है। पिता ने अपनी रिपोर्ट में किसी को नामजद नहीं किया था।

 

बाद में पुतई व दिलीप के आचरण से मृतक बच्ची व पुलिस को शक हुआ तो जाचं की सुई उस दिशा में गयी। तब पता चला कि रात में जब बच्ची शौच के लिए गयी थी तो वहीं पास में मचान में बैठकर खेत की रखवाली करने वाले पुतई ने  दिलीप के साथ मिलकर पहले उसका गैंग रेप किया और बाद में पुतई ने उसका गला घोंटकर उसे मार डाला। बाद में उसकी लाश दूसरे के खेत में फेंक दी।  विवेचना के दौरान घटना स्थल पर पायी गयी एक कंघी को डाग स्कावायड सूंघते हुए दिलीप के  घर पहुंचा। वहीं गांव के ही एक गवाह ने पुतई को घटनास्थल से आते हुए देखा था।  विचारण के बाद अपर सत्र न्यायालय कोर्ट नंबर 13 लखनऊ ने पुतई को रेप और हत्या का दोषी पाकर उसे फांसी की सजा सुनायी थी और सीआरपीसी की धारा 366 के तहत फांसी की सजा पर मुहर लगाने के लिए मामला हाई कोर्ट के संदर्भित कर दिया था।

 

गौरतलब हो कि बिना हाईकोर्ट से कन्फर्म हुए सत्र अदालत द्वारा सुनायी गयी किसी भी फांसी की सजा पर अमल नहीं किया जा सकता है। सत्र अदालत ने पुतई के साथ रेप करने का दोषी पाकर दिलीप को उम्र कैद की सजा सुनायी थी। उधर दोनों ने अपनी अपनी सजा की अपीलें दायर कर हाईकोर्ट में चुनौती दे रखी थी।

 

संदर्भ एवं अपीलों पर एक साथ फैसला सुनाते हुए हाई कोर्ट ने सदंर्भ मंजूर कर लिया और दोनों अपीलें खारिज कर दीं। कोर्ट ने शासकीय अधिवक्ता विमल कुमार श्रीवास्तव के तर्कों को स्वीकार करते हुए परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित इस केस पर अपना फैसला सुनाया। श्रीवास्तव ने कई दिन चली अपनी बहस में पुतई व दिलीप के वकीलों के तर्कों को धाराशायी कर दिया कि अपीलार्थी निर्दोष हैं।

कोर्ट की अन्‍य खबरें: 

पुलिसवालों की समय समय पर करें काउन्सलिंग: हाईकोर्ट

 

लखनऊ: इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कहा है कि पुलिस वालों पर  कार्य का प्रचंड तनाव होता है लिहाजा पुलिस को और अधिक पीपुल्स फ्रेंडली बनाकर उसमें आम लोगों का भरोसा बनाये रखने के लिए समय समय पर उनकी काउन्सलिंग की जानी चाहिए। इसी के मददेनजर कोर्ट ने राज्य सरकार से पूंछा है कि वह पुलिस को और अधिक पीपुल्स फ्रेंडली बनाने के लिए क्या कदम उठा रही है। कोर्ट ने सरकार से यह भी पूंछा है कि सेवा में लेने से पहले या बाद में क्या अभ्यर्थी का मानसिक परीक्षण किया जाता है कि क्या वह पुलिस विभाग में लिये जाने के लिए फिट भी या है नहीं।

 

कोर्ट ने सरकार से यह भी जानकारी मांगी है कि हाल ही में एप्पल के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी हत्याकांड जैसी घटनाओं से बचने के लिए क्या कदम उठाये जा रहे हैं। कोर्ट ने अपर महाधिवक्ता वी के साही से इन सब के बावत 23 अक्टूबर को जानकारी उपलब्ध कराने का कहा है। यह आदेश जस्टिस डी के अरोड़ा व जस्टिस राजन राय की बेंच ने एल के खुराना की ओर से दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान फैसला पारित किया। याची ने हाल के विवेक तिवारी हत्याकांड का हवाला देकर पुलिस विभाग में तमाम सुधारों की मांग की थी।