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Monday, September 25, 2017
विजयादशमी विशेष: हम क्यों न लें दुष्प्रवृतियों से जूझने का सत्संकल्प

विजयादशमी विशेष: हम क्यों न लें दुष्प्रवृतियों से जूझने का सत्संकल्प

लखनऊ: दुनिया में सदा से ही दैवी और आसुरी प्रवृत्ति में संघर्ष होता आया है। दानवी वृतियों पर मानवता की विजय भारतीय संस्कृति के...

‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है’- राष्ट्रकवि दिनकर

 हिन्दी के सुविख्यात कवि रामाधारी सिंह दिनकर का जन्म 23 सितंबर 1908 ई. में सिमरिया, ज़िला मुंगेर (बिहार) में एक सामान्य किसान रवि सिंह तथा

अमा जाने दो: जब मंत्रीजी ही ‘गब्बर’ हैं, तो आखिर ‘मुकरी’ कौन!

आपके फिल्मी कीड़े है तो पता ही होगा कि 15 अगस्त 1975 को गब्बर सिंह का कैरेक्टर पैदा हुआ था। फिर अमजद खान के इस कैरेक्टर के 40 साल बाद अक्षय कुमार ‘गब्बर इजबैक’ से उत्पन्न हुए। चर्चा इसलिए कर रहा हूं कि भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष यानी कि यूपी के पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने खुद को गब्बर सिंह घोषित कर दिया है, खुल्लम-खुल्ला बाकायदा रैली में। डायलॉग भी सुनिए, “दूसरा गब्‍बर, ओमप्रकाश राजभर सोनभद्र में पैदा हो चुका है। अब वो लड़ेगा।”

नवरात्र पर विशेष : करें शक्ति संचय की साधना

लखनऊ: आज के समय की सभी समस्याओं के दो मूल कारण हैं- पहला बाहरी दुनिया में फैली विषाक्तता और हमारे भीतर की दुनिया में...

विचार: स्वदेशी अंतरिक्ष तकनीक क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता

मनुष्य का जिज्ञासु स्वभाव उसकी प्रकृति का हिस्सा है। मानव की खगोलीय खोजें उपनिषदों से शुरू होकर उपग्रहों तक पहुंची हैं। हमारे पूर्वजों ने...
राहुल गांधी भी हुए पीएम मोदी के मुरीद, कहा- मुझसे भी बेहतर वक्ता हैं

अमा जाने दो: मोदी से बच्चन और श्रीधरन तक

अमा जाने दीजिये मोदीजी, क्या कह गए आप। लखनऊवालों को अखरा है। मतलब पान की पीक पर बोल गए आप। विवेकानंद जैसे बड़े आदमी...

हिंदी दिवस: लौट आई अपनी हिंदी साथ लिए

चलते-चलते उम्र ढलान पर आ गई। बच्चे अपने-अपने काम में लग गये पति अपने विजनेस और यात्राओं में व्यस्त रहते। मैं पूरे दिन अकेली...

कहानी: जन्मदाता का हिस्सा, एक पिता का दर्द

आज की इन्सटेन्ट दुनिया में, काच से नाजुक रिश्ते के टूटने पर फिर समटने में हाथ जख्मी कौन करे, यह सोच फिर नया आइना...
UP: बाराबंकी के जेल अधीक्षक पर कारागार मंत्री को घूस देने का केस दर्ज

कविता: दुश्वारी में फंस गए, आज देश के लोग नेता सारे लड़ रहे, काले...

दुश्वारी में फंस गए, आज देश के लोग नेता सारे लड़ रहे, काले धन का रोग काले धन का रोग, भ्रष्टाचार गरमाया फिर जनता का माल, सभी...

कविता: हां मैं हूं बेतरतीब सी… सोचती हूं करीने से कोई साड़ी पहन...

हां मैं हूं बेतरतीब सी... सोचती हूं करीने से कोई साड़ी पहन लूं थोड़ी इत्र डाल महक जाऊं उसी वक्त याद आ जाता है बनाना है तुम्हारी पसंद का खाना फिर...

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