युवा दिवस स्पेशल : कालजयी है स्वामी विवेकानंद की विचार संजीवनी

स्वामी विवेकानंद एक भास्वर सत्ता हैं, जो एक सुनिर्दिष्ट प्रयोजन के लिए दूसरे एक उच्चतर मंडल से इस मर्त्यभूमि पर अवतरित हुए थे। वे कालजयी हैं और कालजयी है उनकी वाणी। युवा भारत के इस  स्वप्नदृष्टा के विचार आज भी उतने ही सामयिक हैं जितने तत्कालीन युग में थे। उनकी आग्नेय वाणी में इतनी ऊर्जा […]

भोजपुरी

सिर्फ बोली नहीं पूर्ण भाषा है भोजपुरी: डॉ राजेन्द्रप्रसाद सिंह

डॉ राजेन्द्रप्रसाद सिंह भोजपुरी और हिंदी के प्रमुख भाषा वैज्ञानिक एवं आलोचक हैं। पूर्वोत्तर भारत की भाषाओं पर सम्पूर्ण रूप से काम करनवाले वे हिंदी के पहले भाषा वैज्ञानिक हैं। उन्होंने एक साथ पंचानवे भाषाओं का शब्दकोश संपादित किया है। वे ऐसे पहले आलोचक हैं जिन्होंने हिंदी साहित्य में सबाल्टर्न अध्ययन का सूत्रपात किया। भोजपुरी […]

कहानीः नगीने वाली अंगूठी

उस रात की तरह आज भी मोहन को नींद नहीं आ रही थी। सिर घुमाकर देखा, पड़ोसी मकानों की छतों पर चारपाइयाँ बिछी हुई थीं, लेकिन किसी चारपाई के नीचे किसी के भी लंबे बाल बिखरे दिखाई नहीं देते थे और न ही किसी का माथा खिली कपास की तरह चमक रहा था। तभी मोहन […]

ख़तरे से घिरा दुनिया का एकमात्र संस्कृत अख़बार ‘सुधर्मा’

बंगलुरू: यह किसी महापुरुष की दैवी शक्ति और संकल्प का ही प्रमाण है। भारत के दक्षिणी राज्य कर्नाटक के मैसूर शहर से एक दैनिक संस्कृत अखबार प्रकाशित होता है। नाम है सुधर्मा। वर्ष 1970 के 15 जुलाई से अनवरत प्रकाशित इस अखबार के संस्थापक थे पंडित वरदराजा आयंगर। बहुत काम लोगों को मालूम है कि पंडित […]

यह दीप अकेला स्नेह भरा है ,गर्व भरा मदमाता : अज्ञेय

यह जन है : गाता गीत जिन्हें फिर और कौन गाएगा ,पनडुब्बा : ये मोती सच्चे फिर कौन कृति लाएगा?यह समिधा : ऐसी आग हठीला बिरला सुलगाएगा।यह अद्वितीय : यह मेरा : यह मैं स्वयं विसर्जित

मृदुला सिन्हा: कार्तिक हे सखी पुण्य महीना, लोकगीतों का मास

मृदुला सिन्हा: कार्तिक हे सखी पुण्य महीना, लोकगीतों का मास

दीप सुंदर सुहावन सुंदर लागि हे / एहो दीवाली के दिन है / राजा रामचंद्र अयोध्या अइले / सेहो दिन भइले दीवाली हे / सेहो दिन लक्ष्मी के आगमन / धन-संपत्ति बाढ़ली हे / सेहो दिन पूजा होइली।

ममता त्रिपाठी की दो कविताएं : गहन निशा है / संकल्प-वर्तिका

उज्जवल ललाट की / उज्ज्वल प्रभा बुलाती। मानस के मोती को / सर-समुद्र खोजती॥ भटकाव खोज हित / एक बार फिर कस्तूरी के। एक बार फिर से / तार जुड़े दूरी के॥

तोताराम ! किस पते पर लिखें खत, कि उन्हें मिट्टी की सोंधी महक तो मिली, घर नहीं

तोताराम ! किस पते पर लिखें खत, कि उन्हें मिट्टी की सोंधी महक तो मिली, घर नहीं

तलाशती हूं तोताराम, तोताराम का प्यार। न मिलने पर थक-हार कर तोताराम को खत लिखना चाहती हूं… लिख कर उससे बात करना चाहती हूं, बताना चाहती हूं उसे कि तुम मुझे याद आते हो, फिर याद आता है कि उसे खत लिखने के लिए तो पता चाहिए। पते के लिए घर और घर ही तो नहीं है तोताराम के पास।

हमें जीने दो : मंदिर, मस्जिद प्यारे हैं, ये गुरु ग्रन्थ भी हमारे हैं

मजहब पर लड़ते हैं, वादों से डरते हैं, कुछ लोग इस देश में नामों पर सियासत करते हैं। इस वक्त हिंदुस्तान एक ऐसी आग में जल रहा है, जिसमें मुस्कुराहट चेहरे का, मिठास जुबान का और इंसानियत दिल का साथ छोड़ चुकी है। फिजा में कड़वाहट घुल गई है। इस अहसास को जाहिर करने के […]