21.6 C
लखनऊ
Friday, November 24, 2017
जाने सुदर्शन क्रिया से जीवन जीने की कला, कैसे सिखातें श्री श्री रविशंकर

जानें सुदर्शन क्रिया से जीवन जीने की कला, कैसे सिखाते हैं श्री श्री रविशंकर

जीवन सांसो की माला है। श्वसन क्रिया चलती रहती है तो जीवन माना जाता है इसके बंद हो जाने पर जीवन को समाप्त हो जाता है। सांस लेने की प्रक्रिया पर हमारे ऋषि, मुनियों ने

शरीर और संसार के साथ ही कर्ता का विस्मरण ही तो है ध्यान

ध्यान कोई विलक्षण क्रिया नहीं है। संसार का प्रत्येक व्यक्ति प्रतिदिन केवल ध्यान ही करता है। यदि किसी से यह पूछा जाये कि आप इस समय कितनी प्रकार की आवाजें सुन रहे हैं तो निश्चित रूप से उसका उत्तर होगा "पता नहीं"।
हरियाणा : सफल महिलाएं 'कन्या हत्यारा' राज्य का कलंक मिटा सकती है?

हरियाणा : सफल महिलाएं ‘कन्या हत्यारा’ राज्य का कलंक मिटा सकती हैं !

हरियाणा में महिलाओं को किस तरह की परेशानी झेलनी पड़ती है, यह सभी जानते हैं। पिछले साल तक, राज्य में पूरे भारत में सबसे कम लिंगानुपात दर्ज किया गया था।
हिजाब नहीं बना बाधक, सल्वा ने हौसलों से भरी सपनों की उड़ान

हिजाब नहीं बना बाधक, सल्वा ने हौसलों से भरी सपनों की उड़ान

मोहम्मद शफीक हैदराबाद: एक दशक पहले एक कार्यक्रम में पूछे गए सवाल पर जब एक बेकरी में काम करने वाले की बेटी ने बड़ी ही...

कंबोडिया का हिंदू साम्राज्य, जहां है विश्व का सबसे बड़ा मंदिर

विश्व का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर परिसर तथा विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक स्मारक कंबोडिया में स्थित है। यह कंबोडिया के अंकोर में है जिसका पुराना नाम ‘यशोधरपुर’ था।

गीतिका: अब छोड़ो भी तकरार प्रिये, क्यों नोंक झोंक हर बार प्रिये

अब छोड़ो भी तकरार प्रिये क्यों नोंक झोंक हर बार प्रिये खुशियों की बारिश में भीगो गम से हो क्यूँ बेज़ार प्रिये ये धरती क्या ये अम्बर क्या अपना...

गज़ल: फिर छिड़ी रात बात फूलों की… फिर छिड़ी रात बात फूलों की

फिर छिड़ी रात बात फूलों की...   फिर छिड़ी रात बात फूलों की रात है या बारात फू लों की   फू ल के हार, फूल के गजरे शाम फूलों...

151 वां जन्मदिन: कॉर्नेलिया सोराबजी, पहली महिला वकील

गूगल अपने सर्च पेज लगातार महान शख्सियतों के ‘डूडल’ डालता रहा है। लोगों को कई बार यहीं से इतिहास के बारे में ऐसी जानकारी...

कहानी: रोटी, अचानक वह जग पड़ी, इस समय ढाई बज रहा था

अचानक वह जग पड़ी। इस समय ढाई बज रहा था, उसने सोचा वह क्यों जाग गई। ओह, रसोई में कोई स्टूल से टकरा गया...

कविता: मौसम बेघर होने लगे हैं, बंजारे लगते हैं मौसम, मौसम बेघर होने लगे...

मौसम बेघर होने लगे हैं बंजारे लगते हैं मौसम मौसम बेघर होने लगे हैं जंगल, पेड, पहाड़, समंदर इंसां सब कुछ काट रहा है छील छील के खाल ज़मीं...

Latest News

Trending