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Monday, December 11, 2017

राहुल बाबा की ताजपोशी : कांग्रेस का धन्यवाद तो बनता ही है…

राहुल बाबा की ताजपोशी से कांग्रेस आत्मविभोर है... लगता है मानो पहाड़ी के पीछे कैद सूरज हाड़ कंपाती सर्दी से बचाने के लिए निकल...

चाबहार बंदरगाह की सफलता भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि

पाकिस्तान और चीन की सभी कूटनीतियों को दरकिनार करते हुए भारत ईरान के रास्ते पहुंचने वाले वैकल्पिक मार्ग, अर्थात चाबहार बंदरगाह को शुरू कराने...

राग – ए- दरबारी: उत्तर प्रदेश का विकास : और नहीं बस और नहीं...

उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा प्रदेश। 22 करोड़ की आबादी और आकार में विश्व के पांचवे देश के बराबर। लोकसभा में 80 सीटें...

विचार : सामूहिक संपदा पर बढ़ता कब्जा, संसाधनों की मची है लूट

प्रेम पंचोली पर्वतीय राज्य उत्तराखंड में 1960-64 के दौरान एक भूमि बन्दोबस्त हुआ था जिसे फिर 40 वर्ष बाद यानी 2004 में करना था। नये...
राजव्यवस्था कबीर से सीख ले तो रामराज्य तक इंतजार नहीं करना होगा

राजव्यवस्था कबीर से सीख ले तो रामराज्य तक इंतजार नहीं करना होगा

मित्र ने आपत्ति दर्ज कराई-कबीर तो जेष्ठ में उमस के बीच आग बरसते दिनों में काशी में पैदा हुए थे यहां तो मंद-मंद शरद ऋतु में प्रकटोत्सव मनाया जा रहा है।मैंने कहा- कबीर
जन्म दिन विशेष: ‘कल सुनना मुझे’, सुदामा पांडे का प्रजातंत्र- ‘धूमिल’

जन्म दिन विशेष: ‘कल सुनना मुझे’, सुदामा पांडे का प्रजातंत्र- ‘धूमिल’

ये कविता वाराणसी के रहने वाले सुदामा पांडे ,धूमिल की हैं । हिंदी साहित्य जगत के यंग्री यंगमैन कहे जाने वाले धूमिल ने ही लिखा था कि तिरंगा तीन थके रंगों का नाम है जिसे एक पहिया ढोता है ।

विचार : महारानी ऐश्वर्या राज लक्ष्मी के मना करने के बाद…

पड़ोस में स्थित भू-परिवेष्ठित मित्र राष्ट्र नेपाल के पूर्व नरेश विरेंद्र बिक्रम शाहदेव व उनके परिवार के अन्य सदस्यों की मर्डर मिस्ट्री को जानने...

शी जिनपिंग युग में प्रवेश कर विश्व को चुनौती दे रहा है चीन

माओ तथा डेंग शियापिंग के बाद अब चीन शी जिनपिंग युग में प्रवेश कर विश्व को चुनौती दे रहा है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की...
महिलाओं ने किया पिंडदान, श्राद्ध , तर्पण, पुरखों की आत्मा की शांति के लिए

आखिर मर्द ही क्यों? हम महिलाएं भी कर सकती हैं पिंडदान

परिजनों  की  आत्मा की शांती के लिए महिलाएं भी आगे बढ़ कर विधि विधान से पिंडदान और अन्य जरुरी कर्मकांड कर रहीं है। परिवार में  किसीपरि।

जब तक कोई बुुलेट पास से न हो कर गुजरे, लगता ही नहीं कि...

जब तक कोई बुुलेट आपके पास से न हो कर गुजरे, लगता ही नहीं कि आप जंग में है।'' शुरु- शरु मे मुझे भी ड़र लगता डर लगा था लेकिन धीरे- धीरे वह  निकलता गया। 1440 में नार्थ वेस्ट फंटियर

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