संजय दत्त की रिहाई पर HC में उठे सवाल, कहा सामान्य कैदियों सा बर्ताव क्यों नहीं

0
309

मुंबई: बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त की मुश्किलें फिर बढ़ सकती हैं। 5 साल की सजा काटने से 8 महीने पहले रिहा हुए संजय दत्त एक बार फिर हाई कोर्ट के निशाने पर है।1993 के मुंबई बम धमाकों में पाए गए दोषी मशहूर कलाकार संजय दत्त को जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ा था। यह विवाद उसी दौरान उनके पैरोल पर बाहर आने से जुड़ा हुआ है।
मुंबई उच्च न्यायालय का कहना है कि वे अभिनेता संजय दत्त को मिली हर पैरोल को जायज़ साबित कर सकती है। कोर्ट ने यह भी माना कि कई मामलों में कैदी के माता-पिता के देहांत के मामले में भी पैरोल नहीं दी जाती जबकि संजय के मामले में उनकी पत्नी के बीमार होने पर भी पैरोल दी गई थी.
न्यायालय ने दत्त की रिहाई पर सवाल किया कि संजय दत्त की रिहाई के लिए जो प्रक्रिया अपनाई गई है क्या वही प्रक्रिया आम कैदियों के लिए भी अपनाई जाती है। कोर्ट ने यह आदेश एक सामाजिक कार्यकर्ता की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को दो हफ्ते में हलफनामा भी दायर करने को कहा है। ऐसा नहीं करने पर कोर्ट द्वारा दिशा-निर्देश जारी करने का अल्टीमेटम दिया गया है।
 “एक मिनट या सेकेंड के लिए भी दत्त का जेल से बाहर जाना कानून का उल्लंघन नहीं था।हम उस हर एक मिनट का लेखा जोखा दे सकते हैं जब उन्हें जेल से बाहर रहने की इजाजत दी गई।” यह सारी बातें महाराष्ट्र के अधिवक्ता आशुतोष कुम्भाकोनी ने अपने बयान में कहीं। उन्होंने आगे ये भी बताया कि हर कैदी को पैरोल देने के लिए वे सख्त और मानक प्रक्रिया का पालन करते हैं, आरटीआई और जनहित याचिकाओं के दौर में हम कोई जोखिम नहीं लेते।
आपको बता दें कि संजय दिसंबर 2014 को अपनी पत्नी मान्यता की खराब तबियत का हवाला देकर बाहर आए और फिर उनकी यह पैरोल तीन बार बढ़ाई गई। इसे लेकर मीडिया में काफी सवाल उठे थे और यह विवाद इतना बढ़ा कि महाराष्ट्र सरकार ने पैरोल के नियम सुधारने के लिए प्रस्ताव भी सदन में रखा।