अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप। कबीरदास का यह दोहा इन दिनों डा भीमराव रामजी आंबेडकर की विरासत को लेकर शुरु हुई रस्साकशी के मद्देनजर प्रासंगिक हो उठा है। राजनीतिक पार्टियां आंबेडकर को अपने पाले में खड़ा करने के लिए अति करने पर आमदा हैं। सपा बसपा कांग्रेस और भाजपा सबने …