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Monthly Archives: April 2018

Yogesh Mishra Special- प्राचीन भारतीय साहित्य में भौतिवाद के वर्तमान सरोकार

Written on April 27, 2018 at 5:31 PM, by

आम तौर पर हम कालिदास को आदि कवि मानते हैं। रामायण को आदि काव्य।  आदिग्रन्थ होने का गौरव ऋग्वेद के हिस्से जाता है क्योकि उसकी ऋचाओं में कविता है। कविता के लक्षण हैं। बावजूद इसके ऋग्वेद को आदि काव्य होने की स्वीकृति नहीं मिली। वेद जीवन पद्धति हैं। मंत्र, तंत्र और कर्मकांड हैं। जीवन, धर्म…

Yogesh Mishra Special- ताकि ये कानून भी रवायत न बन जाय

Written on April 23, 2018 at 5:27 PM, by

भारतीय खेल टीम अकसर ओलंपिक से खाली हाथ लौट आती है। लेकिन हम टीम के प्रदर्शन की आलोचना नहीं करते। टीम का स्वागत करते हैं। इस परंपरा ने तकरीबन हर बार टीम को खाली हाथ या कभी कभार एक-दो मेडल के साथ घर वापसी पर भी नसीहत नहीं देने दी। दिल्ली, सूरत, उन्नाव, एटा, मेरठ,…

Yogesh Mishra Special- आंबेडकर को अति से बचाइए

Written on April 16, 2018 at 5:21 PM, by

अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप। कबीरदास का यह दोहा इन दिनों डा भीमराव रामजी आंबेडकर की विरासत को लेकर शुरु हुई रस्साकशी के मद्देनजर प्रासंगिक हो उठा है। राजनीतिक पार्टियां आंबेडकर को अपने पाले में खड़ा करने के लिए अति करने पर आमदा हैं। सपा बसपा कांग्रेस और भाजपा सबने…

Yogesh Mishra Special- जाति जाती नहीं, जाने नहीं दी जाती….

Written on April 9, 2018 at 5:18 PM, by

जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजियो न ज्ञान। यह बात कबीर ने इसलिए कही थी क्योंकि जब भी ज्ञान प्राप्त होता है तो हर तरह के बंधन टूट जाते हैं। जातियां के बंधन भी। ज्ञान चक्षु खोलता है। हमारे राजनेता इसके ठीक उल्टा चाहते हैं क्योंकि खुले चक्षु से जब हम उन्हें निहारेंगे तो…

Yogesh Mishra Special- संसाधन सुविधा हैं या समस्या

Written on April 2, 2018 at 5:13 PM, by

संसाधन सुविधा हैं या समस्या। यह बहस पुरातन काल से अर्वाचीन तक निररंतर जारी है। कोई ठोस अंतिम निष्कर्ष नहीं निकल पाता है। पक्ष-विपक्ष निरंतर बना है। संसाधन को लेकर कभी कोई बहस निष्कर्ष के किसी अंतिम छोर पर नहीं पहुंची है। संसाधनों को लेकर कोई निष्कर्ष बिना आत्मघटित नहीं मिलता है। आप यह नहीं…